अंधों में काना राजा

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अंधों में काना राजा:- एक बार की बात है। एक कुएं में काफी सारे मेंढक रहते थे। तेरे में बैठे हुए थे तथा सदैव आपस में झगड़ा करते रहते थे। उनके बीच अक्सर ऐसा होता था कि एक समूह दूसरे समूह को नीचा दिखाने का प्रयास करता रहता। एक बार एक समूह के मेंढको ने सलाह की कि क्यों ना किसी तरीके से दूसरे समूह के सभी मेंबर को का सफाया कराया जाए।

अंधों में काना राजा

यह सोचकर वह एक सांप को अपने कुएं में ले आए। कुएं में आते ही सांप ने दूसरे समूह के मेंढको को मार-मार कर खाना शुरु कर दिया। शीघ्र ही दूसरे समूह के मेंढको का सफाया हो गया। अपना मंतव्य पूरा होने पर पहले समूह के मुखिया ने अब सांप को वापस जाने के लिए कहा। अब सांप की बारी थी, सांप ने वापस जाने के लिए तुरंत मना कर दिया क्योंकि कुए में अभी बहुत मेंढक थे और यह तो सर्वविदित है ही की मेंढक तो सांप का प्रिय भोजन होता है।

स्वप्ना मनपसंद भोजन पाकर वह सब धीरे-धीरे , एक -एक करके पहले समूह के मेंढको को भी मार कर खा गया तथा इस तरह कुएं में रहने वाले सभी मेंढको का विनाश हो गया। इस तरह एक दूसरे को नष्ट करने के प्रयास में सभी मेंडक आपस में ही मारे गए।

अतः इसलिए तो कहते हैं कि दूसरों के बारे में बुरा सोचना हमारे अपने लिए हानिकारक हो सकता है।

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