अपने मुंह मियां मिट्ठू

अपने मुंह मियां मिट्ठू:- बहुत पहले की बात है, एक गांव में एक शिकारी रहता था। मगर उससे डिंगे हांकने की बड़ी बुरी आदत थी। वह अक्सर अपने साहस की झूठी कहानियां लोगों को सुनाया करता था।

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वह अक्सर अपने साहस की झूठी कहानियां लोगों को सुनाया करता था अक्सर वह डिंगे हांकता रहता कि उसने फला फला जंगल में शेर का शिकार किया। छोटे-मोटे जानवर तो उसको देखते ही भाग जाते हैं, वगैरह वगैरह। एक दिन की बात है। वह शिकारी जंगल के रास्ते से कहीं जा रहा था। उसे एक लकड़हारा जंगल में लकड़ी काटते हुए नजर आया। लकड़हारे पर अपना रोंब डालने के लिए उसने लकड़हारे से पूछ,”क्या तुमने यहां शेर के पैरों के निशान देखे हैं?”
“हां, और मैं आपको वह स्थान भी दिखा सकता हूं जहां शेर की मां रहती है।”लकड़हारे ने कुल्हाड़ी को पेड़ पर मारते हुए कहा। लकड़हारे के शब्द सुनते ही शिकारी का रंग पीला पड़ गया तथा वह भय से थर थर कापते हुए बोला,”नहीं नहीं, वहां जाने कि मुझे कोई आवश्यकता नहीं है। मैं तो केवल शेर के पंजे के निशान देखना चाहता था।”उस लकड़हारे के सामने अपनी पोल खुलते देख शिकारी वहां से नौ -दो – ग्यारह हो गया। अतः इसलिए कहा भी गया है कि अपने मुंह मियां मिट्ठू नहीं बनना चाहिए।