एक व्यक्ति बाहर नहीं आया

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एक व्यक्ति बाहर नहीं आया:- मनमोहन एक बेरोजगार युवक था। अतः वह राजदरबार इस उम्मीद में गया कि शायद वहां उसे कोई काम मिल जाए। परंतु सैनिकों ने उसे अंदर नहीं जाने दिया। तब उसने नींद नहीं किया कि जब महामंत्री राजमहल से बाहर निकलेंगे, तब वह उनसे नौकरी के लिए बात करेगा। आता है वह राज महल के दरवाजे के पास खड़ा होकर महामंत्री का इंतजार करने लगा।

एक व्यक्ति बाहर नहीं आया

वक्त बिताने के लिए उसने राज महल के अंदर जाने वाले लोगों को गिनना प्रारंभ कर दिया। एक… दो… चौदह! परंतु जब उसने शाम को वापस जाने वाले लोगों को गिना तो वह चौक गया क्योंकि बाहर केवल तेरह लोग ही आए थे।

कुछ समय पश्चात महामंत्री राज महल से बाहर निकले। उन्होंने देखते ही मनमोहन उनके पास नौकरी मांगने आ गया। महामंत्री मनमोहन से बोले,” अभी वह बहुत व्यस्त हैं, अतः वह कल आए।
वापस जाने से पहले मनमोहन ने महामंत्री से कहा,” महोदय! आज राज महल में चौदह लोग अंदर गए थे। परंतु केवल तेरह व्यक्ति ही वापस लौटे हैं। एक व्यक्ति अभी भी महल के अंदर है।”
यह सुनकर महामंत्री ने सारे महल की जांच करवाई। जांच करने पर उन्हें शत्रु देश का एक गुप्तचर राजा के कक्ष में चाकू लेकर छुपा हुआ मिला जो राजा को मारने आया था। मनमोहन के चौकन्नेपन की वजह से महामंत्री ने मनमोहन को राजा का अंगरक्षक नियुक्त कर दिया।

अतः हमें हर समय चौकन्ना रहना चाहिए।

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