ओणम क्या है ओणम का महत्व और ओणम से जुड़ी पौराणिक कथा 2021

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ओणम क्या है ओणम का महत्व

ओणम क्या है ओणम का महत्व – भारत विविधताओं से भरा देश है। यहां के हर प्रांत में अलग-अलग त्यौहार , प्रथाएं तथा परंपराएं मौजूद है, उनमें से ही एक प्रांत केरल है। यहां का त्यौहार ओणम बहुत प्रसिद्ध है। सर्वधर्म समभाव के प्रतीक केरल प्रदेश का मलयाली बुधवार, 7 सितंबर, 2022 से शुरू हो जायेगा।

ओणम क्या है ओणम का महत्व और ओणम से जुड़ी पौराणिक कथा

यह पर्व में 10 दिन तक चलता है। इस पर्व का नाम ओणम है । यह त्यौहार समाज में समरसता की भावना, प्रेम तथा भाईचारे का संदेश देता है। प्राचीन काल से या मान्यता है कि उनके दिन ही राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने आते थे। यह सौभाग्य उन्हें विष्णु जी ने प्रदान किया था। इस पर्व की मान्यता केरल में बहुत ज्यादा है। माना जाता है कि यहां के लोग इस दिन राजा बलि का स्वागत करते हैं।

ओणम पर्व का महत्व – इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं और अलग-अलग तरह के पकवान बनाते हैं। राजा बलि को यह भोजन अर्पित किया जाता है।

  • ओणम पर्व केवल राजा बलि के आने की खुशी में ही नहीं,अपितु नई फसल आने की खुशी में भी मनाया जाता है।
  • हर घर के सामने दिवाली की भांति रंगोली बनाई जाती है तथा साथ ही दीप भी जलाए जाते हैं।
  • इस दिन चावल, गुड़ , नारियल के दूध को मिलाकर खीर बनाई जाती है।
  • कई तरह की सब्जियां तथा सांभर इत्यादि बनाए जाते हैं।
  • मलयाली समाज के लोग एक- दूसरे को गले मिलकर शुभकामनाएं देते हैं।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण पर्व है ओणम 

 केरल में इस समय चाय, इलायची, अदरक और धान जैसी अन्य फसलें पक कर तैयार हो जाती हैं,जोकि किसानों के लिए नई उम्मीद और बेहतर कल का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फसलों की सुरक्षा और अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना के लिए वहां के लोग ओणम के दिन श्रावण देवता और पुष्प देवी की आराधना करते हैं । इस पर्व की तैयारी 10 दिन पहले ही शुरू हो जाती है।

ओणम

ओणम की पूजा विधि

ओणम की एक खास परंपरा है जिसमें लोग अपने घरों पर ही ओणम पुष्प कालीन बनाते हैं, जिससे मलयालम में पुकलम कहा जाता है।

ओणम महोत्सव के पहले दिन केरल वासी भोर में ही सुबह उठकर स्नान आदि कर, पर्व की तैयारियों में लग जाते हैं। इसके बाद वे राजा बलि के मंदिर जाकर उनकी पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद लेते हैं । हर घर में विशेष तौर से सुबह के नाश्ते के लिए केले और फ्राई किए हुए पापड़ बनाए जाते हैं। मान्यता अनुसार कई लोग इसी भोजन को 13 दिनों तक ग्रहण करते हैं। इसके बाद खास परंपरा निभाई जाती है जिसमें लोग अपने घरों पर ओणम कालीन बनाते हैं, जिसे मलयालम में पुकलम कहा जाता है।

ओणम की पूजा विधि

ओणम से जुड़ी पौराणिक कथा

ऐसी मान्यता है कि एक समय में महाबली नाम का असुर राजा हुआ करता था। वह अपनी प्रजा के लिए किसी देवता से कम नहीं था। अन्य असुरों की तरह उसने तपोबल से कई दिव्य शक्तियां हासिल कर देवताओं के लिए मुसीबत बन गया था। शक्ति अपने साथ अहंकार भी लेकर आता है। देवताओं में किसी के भी पास महाबली को परास्त करने का सामर्थ्य नहीं था। राजा महाबली ने देवराज इंद्र को हराकर स्वर्ग लोक पर अपना अधिकार कर लिया। पराजित इंद्र की स्थिति देखकर देवमाता अदिति ने अपने पुत्र के उद्धार के लिए विष्णु की आराधना की।

आराधना से प्रसन्न होकर श्री हरि प्रकट हुए और बोले – देवी आप चिंता ना करें। मैं आप के पुत्र के रूप में जन्म लेकर इंद्र को खोया राजपाट दिलाऊंगा। कुछ समय बाद माता अदिति के गर्भ से वामन के रूप में भगवान विष्णु ने अवतार लिया।उनके ब्रह्मचारी रूप को देखकर सभी देव ऋषि- मुनि आनंदित हो उठे। वहीं राजा बलि स्वर्ग पर स्थाई अधिकार प्राप्त करने के लिए अश्वमेघ यज्ञ करा रहे थे यह जानकर वामन रूप धरे श्रीहरि वहां पहुंचे। उनके तेज से यज्ञशाला प्रकाश में हो गई। महाबली ने उन्हें एक उत्तम आसन पर बिठाकर उनका सत्कार किया ।

अंत में उसे भेंट मांगने के लिए कहा। तब वामन रूप में अवतरित भगवान विष्णु ने महाबली से तीन कदम रखने के लिए जगह मांगी। जिसे स्वीकार कर लिया अपने एक कदम मैं भू – लोक तो दूसरे कदम में आकाश को नाप लिया अब महाबली का वचन पूरा कैसे हो तब उन्होंने वचन के समक्ष अपना सिर झुका दिया। वामन के कदम रखते ही महाबली पाताल लोक चले गए। जब तक यह सूचना पहुंची तो हाहाकार मच गया। प्रजा के आगाध स्नेह को देखकर भगवान विष्णु ने महाबली को वरदान दिया कि वह वर्ष में एक बार तीन दिनों तक अपनी प्रजा से मिलने आ सकेंगे। 

ओणम

ओणम का मुहूर्त

ओणम पर्व तिथि- गुरुवार 8 सितंबर, 2022

तिरुओनम नक्षत्र प्रारंभ- 16:00:42 PM on बुधवार, 7 सितंबर, 2022

तिरुओनम नक्षत्र समाप्त – 13:46:18 PM on गुरुवार , 8 सितंबर, 2022

मलयाली पंचांग के अनुसार कोला वर्षम के प्रथम माह छिंगम जो की अंग्रेजी पंचांग के अनुसार अगस्त से सितंबर महीने के बीच आता है, मे पर्व मनाने की परंपरा है। उत्तर भारत में हिंदू पंचांग के अनुसार कहे तो सूर्य जब सिंह राशि व श्रवण नक्षत्र में होता है तब ओणम का त्योहार मनाया जाता है। सूर्य के इस संयोग से 10 दिन पहले ही ओणम पर्व की तैयारियां शुरू हो जाती है। प्राचीन परंपरा के अनुसार यह हस्त नक्षत्र से शुरू होकर श्रवण नक्षत्र तक मनाया जाता है।उनके प्रथम दिन को अथम और उत्सव के समापन यानी अंतिम दिन को तिरुोओणम या थिरुओनम कहा जाता है।

ओणम पर्व की तिथियां विस्तृत जानकारी, 10 दिनों में ओणम पर्व कैसे मनाया जाता है।

 

ओणम कब मनाया जाता है?

ओणम पर्व तिथि- गुरुवार 8 सितंबर 2022 को हैं।

ओणम से जुड़ी कथा क्या है?

प्राचीन काल से या मान्यता है कि उनके दिन ही राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने आते थे। यह सौभाग्य उन्हें विष्णु जी ने प्रदान किया था।इस दिन राजा बलि का स्वागत करते हैं।

ओणम में किन चीजों का उपयोग होता है?

लोग अपने घरों पर ओणम कालीन बनाते हैं, जिसे मलयालम में पुकलम कहा जाता है।

ओणम कितने दिनों तक मनाया जाता है?

यह पर्व में 10 दिन तक चलता है।

ओणम की खास परंपरा क्या है?

ओणम की एक खास परंपरा है जिसमें लोग अपने घरों पर ही ओणम पुष्प कालीन बनाते हैं, जिससे मलयालम में पुकलम कहा जाता है।

ओणम में किस देवता की पूजा की जाती है?

ओणम के दिन श्रावण देवता और पुष्प देवी की आराधना करते हैं।

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