कंजूसी की हद

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कंजूसी की हद:- एक गांव में धनी राम नाम का एक कंजूस धनवान व्यक्ति रहता था। एक बार वैद्यजी मैं उससे नारियल पानी पीने का सुझाव दिया। बाजार में जाकर उसने एक व्यक्ति से नारियल का भाव पूछा।

कंजूसी की हदकंजूसी की हद

” दस रुपए का एक” नारियल वाले ने कहा।
” पांच रुपए मैं दोगे?” धनीराम बोला।
” नहीं, मगर मंडी में आपको पांच रुपए का मिल सकता है।”
नारियल वाला बोला। कंजूस सेठ दो मील पैदल चल कर मंडी पहुंचा। वहां पांच रुपए मैं नारियल पाकर वह बोला,” क्या नारियल 3 रुपए में दोगे?” दुकानदार बोला,” तीन रुपए में नारियल तो केवल समुद्र के तट पर ही मिलेगा। और तट यहां से चार मील दूर है।”

कंजूस सेठ इतनी दूरी टैंकर के तट के पास पहुंचा। वहां नारियल वाले से नारियल तीन रुपए की जगह एक रुपए में देने की जिद करने लगा। नारियल वाला बोला,” अगर एक रुपए में नारियल चाहिए तो नारियल के पेड़ पर चढ़कर नारियल तोड़ लो।”
“हां, यह ठीक रहेगा” यह कहकर धनीराम नारियल के पेड़ पर चढ़ गया। तथा दोनों हाथों में नारियल पकड़ कर जोर से खींचने लगा। नारियल के साथ-साथ यह खुद भी जमीन पर आ गिरा तथा उसकी कमर की हड्डी टूट गई
कमर का इलाज कराने में दस हजार रुपए लगे। अतः धनीराम को एक नारियल की कीमत दस हजार चुकानी पड़ी।

अतः कंजूसी बुरी आदत है।

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