कंजूस की कंजूसी

कंजूस की कंजूसी:- एक गांव में एक कंजूस रहता था। उसकी कंजूसी के किस्से दूर-दूर तक फैले हुए थे।
1 दिन कंजूस को किसी काम से शहर जाना पड़ा। काम समाप्त होने तक श्याम हो जाने पर वह अपने मित्र के घर रुक गया। कंजूस के मित्र को कंजूस के किस्से मालूम थे। अतः उसने कंजूस को सबक सिखाने की सोची। उसने कंजूस से कहा,” चलो बाजार चलते हैं। वहां जिस चीज को तुम सबसे अच्छा कहोगे, उसी से मैं तुम्हारा भोग लगवाऊंगा।”

कंजूस की कंजूसी

कंजूस अपने मित्र के साथ खुशी-खुशी बाजार चल पड़ा। वहां खाने की थाली देखकर मित्र से पूछा,” यह खाना कैसा है?” रसोइए ने जवाब दिया,” मिठाई जैसा स्वादिष्ट है।” मित्र कंजूस से बोला,” इससे उत्तम तो मिठाई है। चलो, वही खाते हैं।” तब वे दोनों हलवाई के पास पहुंचे। हलवाई से जब मिठाई के बारे में पूछा तो वह बोला,” श्रीमान! मिठाई शहद जैसी मीठी है।”

कंजूस का मित्र बोला,” तब हमें शहद चखना चाहिए।” शहद की दुकान पर दुकानदार ने शहद को पानी जैसा उत्तम बताया। तब कंजूस का मित्र बोला,” अरे सबसे उत्तम तो पानी है। अतः मैं पानी से आप को भोग लगवाता हूं।”

घर पहुंचते ही उसने कंजूस के सामने पानी के घंटों का ढेर लगा दिया।
अब कंजूस की आंखें खुल गई थी। कंजूसी के कारण आज उसे भूखे पेट पानी पीकर सोना पड़ रहा था।

अतः जैसे को तैसा ही मिलता है।