किसान की दरियादिली

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किसान की दरियादिली:- राजा सूर्य प्रताप की सेना युद्ध जीतकर सीमा से राजधानी की ओर प्रस्थान कर रही थी। सेना के पास एक पत्र खाद्य सामग्री समाप्त होने पर मंत्री ने सैनिकों को आदेश दिया कि वह समीप के गांव में जाकर खेत से फसल काट लाए।

किसान की दरियादिलीकिसान की दरियादिली

सैनिकों की एक टुकड़ी फल लाने चल पड़ी। मार में सैनिकों को एक किसान मिला। सेनानायक ने उससे पूछा,” सुनो भाई! क्या तुम हमें इस इलाके के सबसे बड़े खेत में ले जा सकते हो जहां हम अनाज व फल सब्जियां सभी एक साथ मिल जाए।”

किसान उन्हें एक बहुत बड़े खेत के पास ले गया। सेनानायक में फसल काटने का आदेश दिया। यह सुनकर किसान सेनानायक से बोला,” मान्यवर, यह खेत बड़ा अवश्य है लेकिन इससे अच्छी फसल तो दूसरे खेत में उगी हुई है।” सेनानायक सेना सहित तुरंत दूसरे खेत पर चला गया। वह एक छोटा सा खेत था। सैनिकों ने पूरे खेत की फसल काटकर बोरों में भर ली। जाते समय सेनानायक ने किसान से पूछा “फसल तो दोनों ही खेतों में समान थी। फिर तुम हमें इतनी दूर इस छोटे से खेत के पास क्यों लाए?”

किसान ने हाथ जोड़कर कहा,” वह खेत मेरा नहीं था। यह छोटा सा खेत मेरा है। इसलिए मैं आपको यहां लेकर आया।” सैनिक फसल लेकर चले गए। उन्होंने यह बात राजा को बताई। राजा ने उस किसान को उसकी फसल की अच्छी कीमत अदा की।

अतः उदारता बहुत बड़ा धन है।

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