कुम्हार के घड़े

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कुम्हार के घड़े:- किसी गांव में एक कुम्हार रहता था। उसके बनाए गणों की बाजार में भारी मांग थी और उसका व्यवसाय बहुत अच्छा चल रहा था। परंतु कभी-कभी उसे ऐसी शिकायतें भी सुननी पड़ती कि उसके बनाए घडे जल्दी टूट जाते हैं।

कुम्हार के घड़ेकुम्हार के घड़े

शिकायते सुन-सुन कर वह दुखी हो गया। अतः उसने देवी से प्रार्थना करनी शुरू कर दी। आखिर एक दिन देवी ने उसकी प्रार्थना सुन ली। कुम्हार देवी से बोला,” हे माता! मेरे बनाए घड़ों को ऐसा मजबूत कर दो कि वह कभी न टूटे।” देवी ने उसे उसकी इच्छा पूरी होने का आशीर्वाद दे दिया।
मजबूत घड़े को जाने के कारण कुछ दिनों तक तो उसकी बहुत बिक्री हुई परंतु एक माह बाद तो कोई भी व्यक्ति घड़े खरीदने नहीं आया।

कुम्हार के भूखो मरने की नौबत आ गई। वह लोगों से घड़े खरीदने को कहता तो वे उसे जवाब देते,” भाई, तुम्हारे बनाए गए इतने पक्के हैं कि टूटते ही नहीं। सो अब हमें नए घड़ों की आवश्यकता नहीं है।” दुखी होकर कुम्हार फिर देवी से प्रार्थना करने लगा। देवी के दर्शन देने पर कुमार प्रार्थना करते हुए बोला,” माता! मुझसे बड़ी भूल हो गई जो मैं प्रकृति के विपरीत गया। मेरे घड़े पहले जैसे साधारण ही बना दीजिए।”

देवी ने उसके घड़े पहले जैसे साधारण बना दिए। अब फिर से घड़े टूटने लगे तो उसका व्यवसाय फिर से चल निकला।

अतः जो वस्तु जैसी है, हमें उसी में संतुष्ट रहना चाहिए।

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