कौआ बना मोर

- Advertisement -

More articles

- Advertisement -

कौआ बना मोर:- एक कौआ अपने काले होने का बहुत दुख था। वह अक्सर सोचता की काश! वह भी सुंदर और रंग बिरंगा होता। एक दिन वह पेड़ की शाखा पर बैठा था। बरसात का मौसम था। पेड़ के नीचे कुछ मोर अपने पंख फैला कर जा रहे थे। मोरों के सुंदर आंखों को देखकर वह सोचने लगा “काश ! इतने सुंदर पंख मेरे होते तो मैं भी मोर बन जाता।”

कौआ बना मोर

मोरों के जाने के बाद उसने देखा कि उनके कुछ पंख नीचे गिरे हुए है। वह नीचे गया और उसने मोरों के सारे पंख उठा लिए फिर अपने मित्र बंदर के पास पहुंच कर उसने उससे अपने शरीर पर मोर के पंख लगवा लिए।

मोर के पंख लगा कर वह अपने आपको किसी मोड़ से कम नहीं समझ रहा था। वह मोरो के झुंड में पहुंचा तथा उनसे बोला,” मैं तुम्हारा नया साथी हूं। मुझे भी अपने साथ ले लो।” मोरो ने एक कौए को अपने पंख लगाकर मोर बने देख तो वह सब उस पर टूट पड़े और उसे मारने लगे। उन्होंने उसके सारे पंख नोच डाले।

कोआ जान बचाकर वहां से भागा तथा सीधा अपने अन्य भाइयों के पास पहुंचा। वह सब भी कोए की इस हरकत को देख रहे थे। उन्होंने भी कोए को अपने साथ रखने से मना कर दिया। इस तरह मुर्ख कोआ मोर बनने के चक्कर में अपने जून से भी निकाला गया।

अतः अपने असली रूप को भूलकर हमें कभी किसी की नकल नहीं करनी चाहिए।

- Advertisement -

MOST POPULAR ARTICLES

TRENDING NOW

Latest

- Advertisement -