खजांची का चुनाव

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खजांची का चुनाव:- बूढ़े खजांची की मृत्यु के बाद इस पद के लिए महाराज किसी इमानदार व्यक्ति को रखना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने राज्य भर में मुनादी करवा दी कि जो भी व्यक्ति राज महल में नौकरी करने का इच्छुक है, अमुक दिन सुबह राज महल में पहुंच जाएं।

खजांची का चुनाव

निश्चित दिन बहुत सारे व्यक्ति राजमहल के प्रांगण में एकत्र हो गए। राजा तक पहुंचने से पहले सभी को एक-एक करके विशेष रूप से बनाए गए रास्ते से होकर गुजरना था जहां राजा ने सोने-चांदी, स्वर्ण मुद्राओं से भरे मटके रखवा दिए थे। निर्धारित रास्ता तय करने के बाद वह सब एक बड़े हाल में पहुंचे।
दरबार में पहुंचकर राजा ने सभी को नृत्य करने का आदेश दिया। साथ ही यह भी आदेश दिया कि बिना उसकी आज्ञा के नृत्य बंद करने पर मृत्यु दंड दिया जाएगा। मृत्यु के भय से सब नृत्य करने लगे।

नृत्य करते हुए सभी लोगों के पास से मुद्राएं तथा गहने निकलकर बाहर गिरने लगे, जो उन्होने राजा द्वारा बनाए गए रास्ते से चुपके से उठा लिए थे।

केवल एक व्यक्ति ही ऐसा था। जिसके पास से नृत्य करते समय कोई मुद्रा व गहने प्राप्त नहीं हुए।
राजा ने नृत्य रोकने का आदेश दिया। जिन सब की चोरी पकड़ी गई उन्हें उन्हें दस- दस कोड़ों का दंड मिला तथा जिस व्यक्ति के पास कोई धन नहीं मिला, उसे खजांची नियुक्त कर दिया गया।

अतः इमानदारी सबसे बड़ा धन है।

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