घमंडी तितली

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घमंडी तितली:- एक बार एक बहुत सुंदर तितली जंगल के इधर-उधर उड़ रही थी। उसने एक हाथी का बच्चा देखा। उससे बात करने के लिए वह उसके कान के पास जाकर बैठ गई। हाथी ने उससे पूछा,” कौन हो तुम? और कहां जा रही हो?”

घमंडी तितलीघमंडी तितली

” अरे तुम मुझे नहीं जानते,” तितली ने हैरान होते हुए कहा,” मैं तो सबसे सुंदर तितली हूं। तुम्हारा तो भारी भरकम शरीर है परंतु मेरे नाजुक व सुंदर पंखों के कारण लोग मुझसे जलते हैं। इनसे मैं कहीं भी उड़ कर जा सकती हूं।”
हाथी बड़े ही शांत भाव से बोला,” ओह! अच्छा, तुमसे मिलकर प्रसन्नता हुई।” तितली रूप के घमंड में इठलाती हुई बोली,” तुम्हारा और मेरा क्या मुकाबला? तुम्हारी चार टांगे है। जबकि मेरी छह तांगे है। हम दोनों में केवल एक ही समानता है। तुम्हारे पास सूंड है जबकि मेरे पास दो चुषक है। परंतु तुम्हारी सूंड फूलों से रस नहीं चूस सकती जबकि मैं फूलों से रस चुस्ती हूं।”
हाथी चुपचाप यह है सब सुन रहा था। तभी हवा का एक झोंका आया। तितली अपने आप को संभालना सकी और हवा ने उसे दूर उछाल करके दिया जबकि हाथी अपने स्थान पर अडिग खड़ा रहा।

तितली मदद के लिए चिल्ला रही थी, “अरे! कोई मुझे बचाओ।” जब तक हाथी उसकी मदद करता, तितली हवा के तेज बहाव के साथ गायब हो चुकी थी।

किसी ने ठीक ही कहा है थोथा चना बाजे घना।

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