चतुर मोनू

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चतुर मोनू:- मोनू एक समझदार और हाजिर जवाब लड़का था। उसकी हाजिर जवाबी से लोग निरुत्तर हो जाते थे।

चतुर मोनूचतुर मोनू

रविवार का दिन था।कुछ लोग आपस में बातें करते हुए जा रहे थे। बातों का सिलसिला चलते-चलते मोनू पर आ गया। उसमें से एक बोला,” मोनू का दिमाग तो कंप्यूटर से भी तेज चलता है।” शास्त्री जी बोले,” उसके पास हर प्रश्न का उत्तर पहले से ही मौजूद रहता है।” अभी शास्त्री जी कह ही रहे थे कि सामने से मोनू ने आकर उन्हें प्रणाम किया और बगल में खड़े फल वाले से अमरूद खरीदने लगा। फल वाले ने 500 ग्राम के स्थान पर 350 ग्राम अमरुद खोलकर मोनू को दिए।
मोनू ने अमरूद लेते हुए कहा,” यह अमरूद तो वजन में कम है।”

” अरे नहीं! यह अमरूद ठीक है।” फल वाले ने घूरते हुए कहा,” और फिर तुम्हें अमरुद ले जाने में भी तो आसानी रहेगी।”
अमरूद लेकर मोनू ने फल वाले के हाथ में पैसे रख दिए। पैसे कम थे। फलवाला मोनू से बोला,” अरे सुनो लड़के! तुमने कम पैसे दिए हैं। पूरे पैसे दो।”
मोनू ने शांत भाव से कहा,” अरे नहीं! पैसे तो पूरे हैं। यदि हम भी हैं तो तुम्हारे लिए अच्छा ही है। तुम्हें पैसे रखने और गिनने में आसानी रहेगी।”
फलवाला अपना सा मुंह लेकर रह गया।

इसीलिए तो कहा गया है कि शेर को सवा शेर मिलता ही है।

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