चालाक चूहा

चालाक चूहा:- एक छोटा चूहा इधर-उधर खेल रहा था। कभी वह इधर को फुदकता तो कभी उधर को। अचानक उसने एक बड़े बैल को देखा जो अपनी नाक से तेज आवाजे निकालता सो रहा था। चूहे को उससे शरारत करने की सूझी।

चालाक चूहा

चालाक चूहा

उसने अपने दो से बैल की नाक बंद कर दी। नाक के होते ही बैल नींद से जाग गया। जागते के साथ ही उसने अपने पास से भागते हुए चूहे को देख लिया था। उसे समझते देर न लगी कि इसी चूहे के कारण उसकी नींद टूटी है। उसका दिमाग गुस्से से सातवें आसमान पर चढ़ गया। अपने नथुनों को बुलाते हुए वह बोला,” मैं तुच्छ प्राणी को अवश्य सबक सिखाऊंगा।”

ऐसा कहकर वह चूहे को मारने दौड़ा। चूहा दीवार के बने एक बिल में घुस गया। बेल ने जो से दीवार में टक्कर मारी। जिसके कारण दीवार टूट गई तथा बैल के सिर में चोट लगी। परंतु चूहा अभी भी अपने बिल में सुरक्षित था। इस प्रकार फैल गुस्से में दीवार प इस प्रकार फैल गुस्से में दीवार पर सिर मारता रहा। वह चूहे को थोड़ा सा भी नुकसान नहीं पहुंचा सका, अपितु स्वयं लहू-लुहान हो गया।

अतः कहा भी गया है शत्रु यदि छोटा है तो भी उसे कमजोर समझना चाहिए तथा शत्रु पर वार करने से पहले उसकी स्थिति अवश्य जांच लेनी चाहिए।