Dhanteras 2021 – धनतेरस क्यों मनाया जाता है ?

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धनतेरस क्यों मनाया जाता है- धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी और धन्वंतरी की पूजा की जाती है डहंटर्स का पर्व दिवाली के दो दिन पहले मनाया जाता है लक्ष्मी जी और धन्वंतरी का जन्म समुद्र मंथन से हुआ था। धनतेरस के दिन इनके साथ कुबरे देवता और यमराज जी की पूजा की जाती है धनतेरस के दिन दक्षिण दिशा में दीप दान करने से अकाल मृत्यु का योग खत्म होता है धनतेरस के दिन चांदी और नए भरतन खरीदना शुभ माना जाता है। इन सबके पीछे कई कथाये है। धनतेरस की पूजा पूजा सूर्यास्त और दिन के अंत के अगले एक घंटे और 43 मिनट के बाद शुरू की जा सकती है।

Dhanteras 2021  का महत्व

दीपावली का समाप्त होते ही लोगों में दीपावली के आने की उत्सुकता बढ़ जाती है बाजार बस जाती है और लोग भी जोर शोर से दीपावली की तैयारियों में लग जाते हैं दीपावली का त्यौहार एक दिन का नहीं ऐसा लगता है 1 महीने का त्योहार हो दीपावली से 1 दिन पहले से लेकर अगले दो-तीन दिनों तक छोटे-छोटे त्योहार इस पर्व के उत्साह को खत्म नहीं होने देते। लक्ष्मी ने एक गरीब किसान को वरदान दिया था और हमेशा के लिए उस पर लक्ष्मी कृपा बरसाते रहने का वचन दिया था।

धनतेरस क्यों मनाया जाता है

 

यह दिन यमदेव को भी समर्पित है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन यमराज के निमित्त दीपदान किया जाना चाहिए ऐसा करने से उस परिवार में अकाल मृत्यु नहीं होती। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन की का जन्म हुआ था इसलिए किस तिथि को धनतेरस की नाम से जाना जाता है। भगवान धन्वंतरि जिन्हे चिकत्सा का देवता भी कहा गया है जब भी प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था भगवान धन्वंतरि क्योंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परंपरा है।

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धनतेरस कब मनाई जाती हैं 

यह कार्तिक मासकृष्ण पक्ष की तेरस के दिन मनाई जाती हैं. इस दिन कुबेर, लक्ष्मी, धन्वन्तरी एवम यमराज का पूजा की जाती हैं. यह दिन दीपावली के दो दिवस पूर्व मनाया जाता हैं. इसी दिन से दीपावली महापर्व की शुरुवात होती हैं । 

धनतेरस का त्यौहार क्यों मनाया जाता है

धनतेरस पर्व त्यौहार मनाने का कारण क्या है कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है इस दिन समुद्र मंथन के समय हाथों में अमृत कलश लिए हुए भगवान विष्णु ही धन मंत्री रूप में प्रकट हुए थे। इस विषय में विस्तार से पुराणों में कहा गया श्रीमद्भागवत पुराण के उनके हाथों में अमृत से भरा हुआ कलश था वे साक्षात विष्णु भगवान के अक्षांश अवतार थे वही आयुर्वेद के प्रवर्तक यानी जनक और यज्ञ भोक्ता धनवंतरी नाम से प्रसिद्ध हुए ब्रह्मवैवर्त पुराण में श्री कृष्ण ने कहा कि भगवान धन्वंतरी स्वयं महान पुरुष है और साक्षात् नारायण के अनुरूप है।

पूर्व काल में जब समुद्र का मंथन हो रहा था उस समय महासागर से उनका प्रादुर्भाव हुआ अधिक भगवान विष्णु के धन मंत्री रूप में प्रकट होने पर या धनतेरस का पावन दिवस मनाया जाता है भगवान धन्वंतरी आयुर्वेद के जनक और वेद के रूप में जाने जाते हैं यहां पर एक और बात ध्यान रहे आयुर्वेद के जनक का मतलब यह नहीं है कि धन मंत्री जी ने आयुर्वेद के नियमों को बनाया था उनका निर्माण किया था ऐसा नहीं है भगवान धन्वंतरी आयुर्वेद को प्रकट किया था जैसे अनेक संतों के मत तथा वेद पुराण के प्रमाण द्वारा हम वेदों शास्त्रों के सिद्धांत को आप लोगों के समक्ष रखते हैं।

 

धनतेरस बधाई  शायरी

घर में हो धन धान्य और वैभव पुरे करो विधि विधान और कर्तव्य प्रसन्न होगी देवी लक्ष्मी सदा तुम पर अगर रखोगे साफ़ सफाई घर पर

कमल फुल पर आसीन उल्लू हैं जिनकी सवारी ऐसी देवी लक्ष्मी पधारे हम होंगे जीवन भर आभारी

धनतेरस की हैं सबको बधाई सदा रहे घर में लक्ष्मी की परछाई प्रेम मोहब्बत से रहना सब धन के रूप में बसता हैं रब

घनर घनर बरसे जैसे घटा वैसे ही हो धन की वर्षा मंगलमय को यह त्यौहार भेंट में आयें उपहार ही उपहार

धनतेरस की कथा

हेम नाम क राजा थे उनकी की संतान नहीं थी बहुत मानता मानने के बाद देव गण कृपा से उनको पुत्री की प्राप्ति हो गई जब उन्होने पुत्र की कुंडली बनाई तब ज्योतिष ने कहा इस बालक की शादी के दसवे दिन इसकी मृत्यु का योग है ,यह सुनकर राजा ने पुत्र की शादी ना करने का निश्चय किया और उसे एक ऐसे स्थान पर बेज दिया जहाँ कोई स्त्री न हो परन्तु तक़दीर के आगे किसी की नहीं चलती घने जंगल में राजा के पुत्र को एक सुन्दर कन्या मिली जिससे उन्हें प्रेम हो गया और दोनों ने विवाह कर लिया। भविष्यवाणी के दौरान पुत्र की दसवे दिन मृत्यु का समय आ गया था।

उसके प्राण लेने के लिए यमराज के दूत यमदूत पृथ्वीलोक पर आए परन्तु वह अपने कर्तव्य के आगे विवश थे। याम दूत जब प्राण लेकर यमराज के पास फुहे तब बहुत दुखी थी यमराज ने कहा दुखी होना तो स्वाभाविक है परन्तु हम इसके आगे विवश है ऐसे में यमदूत ने यमराज से पूछा कि यह है राजन क्या इस अकाल मृत्यु को रोकने का कोई तरीका नहीं है तब यमराज ने जवाब दिया यदि मनुष्य कार्तिक कृष्ण पक्ष कि त्रयोदशी के दिन कोई व्यक्ति संध्याकाल में अपने घर के द्वार पर दक्षिण दिशा में दिप जलाएगा। तो उनके जीवन में अकाल मृत्यु का योग टल जायेगा इस कारण धनतेरस के दिन यमराज की पूजा की जाती है। 

धनतेरस के दिन किस भगवान की पूजा की जाती है ?

धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है।

धनतेरस दीपावली के कितने दिन पहले आता है ?

धनतेरस दीपावली के 2 दिन पहले आता है।

धनतेरस के दिन कौनसे बर्तन लेना शुभ माना जाता है ?

धनतेरस के दिन चांदी के बर्तन लेना शुभ माना जाता है।

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