पाया या गवाया

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पाया या गवाया:- बिजली की कटौती के कारण अक्सर बिजली चली जाती थी। अतः रमेश पास की दुकान से मोमबत्ती लेने गया। उसने दो-दो रुपए की दो मोमबत्ती ली। दुकानदार को उसने दस रुपए का एक नोट दिया। बदले में दुकानदार ने उसे एक पांच का नोट तथा दो पचास पैसे के सिक्के लौटाए।

पाया या गवाया

घर पहुंचने पर बिजली न पाकर रमेश ने एक मोमबत्ती जला दी। दूसरी मोमबत्ती रखते समय उसका पचास पैसे का एक सिक्का नीचे गिर कर अंधेरे में खो गया।
रमेश सिक्का ढूंढने लगा। परंतु पर्याप्त रोशनी न होने के कारण उसे सिक्का नहीं मिल रहा था। उसने दूसरी मोमबत्ती भी जला ली। अब दोनों मोमबत्ती ओके जलने के कारण रोशनी पर्याप्त हो रही थी। वह फिर से दोनों मोमबत्ती की रोशनी में अपना सिक्का ढूंढने लगा।

आखिरकार उसे सिक्का मिल ही गया। सिक्का पाकर रमेश बहुत खुश हुआ, लेकिन तब तक दोनों मोमबत्तियां जल कर समाप्त हो चुकी थी। और घर में अंधेरा फैल चुका था। रमेश की खुशी दूर हो गई और उसे अपने ऊपर झुंझलाहट होने लगी कि बिजली के आने तक उसने पचास पैसे के सिक्के को ढूंढना क्यों नहीं टाल दिया। यदि उसने ऐसा किया होता तो इस वक्त घर में अंधेरा नहीं होता। रमेश ने पचास पैसे के सिक्के के लिए दो रुपए का नुकसान कर लिया।

अतः हमें सूझ-बूझ से काम लेना चाहिए।

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