पुण्यदायी अधिक मास प्रारंभ | जानिए की कैसे बनता है अधिक मास या पुरुषोत्तम मास

अधिक मास: हिंदू कैलेंडर के अनुसार अधिकमास प्रथम अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा संवत 2077 आज शुक्रवार 18 सितंबर 2020 से प्रारंभ होकर 16 अक्टूबर 2020 को समाप्त होगा।

क्या है यह पुण्यदायी अधिक मास

जैसा कि हम सब जानते हैं, चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है। चंद्रमा को अपनी एक परिक्रमा पूरी करने में 29.5 दिन का समय लगता हैं। चंद्रमा की 12 परिक्रमा 354 दिन में पूरी होती है। इसलिए चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है, जबकि सूर्य को 365 दिन लगते हैं। जो सूर्य वर्ष से 11 दिन कम होता है। इस प्रकार 3 वर्षों में 33 दिन का अंतर आ जाता है। इसी अंतर को कम करने के लिए हर 3 वर्ष में एक चंद्रमास अस्तित्व में आता है, जिसे अधिकमास या मलमास या पुरुषोत्तम मास या दो अश्विन कह कर संबोधित किया जाता है।

अधिक मास का महत्व

अधिक मास अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। पूजा अर्चना के लिए यह मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस मास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। भगवान विष्णु की आराधना करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस मास में शुभ कार्य यथा ग्रह प्रवेश, विवाह, मुंडन संस्कार इत्यादि नहीं किए जाते हैं। इस माह में प्रदोष व्रत, संकष्टी व्रत के अलावा कोई व्रत-त्योहार नहीं होता। इस माह में व्रत करना, स्नान करना, भगवान को जल अर्पित करना, यज्ञ करना, हवन करना इत्यादि का विशेष महत्व है।

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कह कर संबोधित किया जाता है आइए, इस पर विचार करते हैं-

इस मास को पुरुषोत्तम मास का नाम देने के पीछे रहस्य इस प्रकार है-

अहमेते यथा लोके प्रथित: पुरुषोत्तम:।
तथायमपि लोकेषु प्रथित: पुरुषोत्तम:।।

भगवान विष्णु ने कहा, मैं वेदों,लोकों तथा शास्त्रों में पुरुषोत्तम नाम से प्रसिद्ध हूं। उसी प्रकार यह मास भी भूमि पर अर्थात् धरती पर पुरुषोत्तम मास नाम से प्रसिद्ध होगा और मैं स्वयं इसका प्रतिनिधित्व करूंगा। स्वामी होऊंगा।

एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने इस मास को मलमास कहे जाने पर वरदान दिया, कि यह मास पुरुषोत्तम माह के नाम से पुकारा जाएगा और मैं स्वयं इस माह का स्वामी होऊंगा। इस महीने में जो व्यक्ति मेरी पूजा, उपासना, आराधना सच्ची निष्ठा से करेगा, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होगी।

अधिक मास

खास संयोग जो इस माह में है-

लीप ईयर, अश्विन पुरुषोत्तम मास दोनों इस वर्ष एक साथ आए हैं। इस बार शुभ संयोग है, कि लीप वर्ष व अश्विन पुरुषोत्तम मास 160 साल बाद एक साथ आयें, जो वर्ष 1860 में एक साथ आये थे, अब यह संयोग वर्ष 2039 में बनेगा।

इस माह में भगवान विष्णु को इन चीजों का अर्पण करें

इस माह में भगवान विष्णु की पूजा करें। उनको चंदन लगाकर तुलसी पत्र, खुशबूदार अच्छे पुष्प, नैवेद्या, ताजे फल आदि चढ़ाएं। भगवान विष्णु के इन मंत्रों का उच्चारण करें-

ॐ नमोः नारायणाय॥

ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥

ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
   तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

भगवान विष्णु की पौराणिक कथाएं,श्रीमद् भागवत कथा, गीता का पाठ, श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ इस महीने में करना चाहिए। इन सब क्रियाओं से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और हमें मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस माह में पीले वस्त्रों को धारण करने का भी विशेष महत्व है। पीला रंग भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय था।

मलमास में वर्जित कार्य

इस महीने में गृह प्रवेश, मुंडन कार्यक्रम, शिष्य दीक्षा कार्यक्रम, देवी- देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम, कोई भी नई शुभ मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।

दान का महत्व

इस महीने में व्रत, दान आदि कार्य का विशेष महत्व है। किसी भी प्रकार का दान करना शुभ रहता है। दान पुण्य करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और हमें भी हमारे इच्छित फल की प्राप्ति होती है। इस माह में दान करने से वंश वृद्धि, संतान प्राप्ति, दुखों का विनाश, आयु, स्वास्थ्य आदि की प्राप्ति होती है।

भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए हम उनकी आरती का वाचन भी करते हैं…..

ओम जय जगदीश हरे, ओम जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करे।। ओम् जय…
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनशे मन का।
सुख संपति घर आवे कष्ट मिटे तन का।। ओम् जय…
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा- आश करूं किसकी।। ओम् जय….
तुम पूरण परमात्मा तुम अंतर्यामी।
पार ब्रह्म परमेश्वर तुम सबके स्वामी।। ओम् जय…
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं सेवक तुम स्वामी कृपा करो भर्ता।। ओम् जय…
तुम हो एक अगोचर सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय तुमको मैं कुमति। ओम् जय…
दीनबंधु दु:ख हर्ता तुम रक्षक मेरे।
करुणा हस्त बढ़ाओ शरण पड़ा तेरी।। ओम् जय….
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ संतन की सेवा। ओम् जय….

मलमास कब से प्रारंभ हो रहा है?

मलमास या अधिक मास 18 सितंबर 2020 से प्रारंभ होकर 16 अक्टूबर 2020 तक रहेगा।

मलमास या अधिक मास क्यों आता है?

चंद्र वर्ष व सूर्य वर्ष के बीच अंतर के कारण मलमास या अधिक मास आता है।

मलमास का संबंध किस देवता से है?

इस माह का संबंध भगवान विष्णु से है।