बाज और बुलबुल

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बाज और बुलबुल:- एक बुलबुल ताड़ के ऊंचे पेड़ पर बैठी हुई थी। ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी। बुलबुल भी काफी खुशी दिखाई दे रही थी। खुशी का प्रदर्शन करने के लिए वह अपनी मीठी आवाज में गाना गाने लगी।

बाज और बुलबुल

एक धोखेबाज ने उसका गाना सुना। गाने की आवाज का पीछा करते हुए उसने बुलबुल को पेड़ की डाल पर बैठा देख तेजी से झपटा मारकर उसे अपने पंजों में जकड़ लिया।
बुलबुल एकदम डर गई। फिर वह बाज को खुश करने के लिए बोली,” मुझे जाने दो। मैं तो एक बहुत छोटी सी चिड़िया हूं। मुझसे तुम्हारी भूख बिल्कुल नहीं मिटेगी।” उसकी बात को सुनकर बाद हंसते हुए बोला,” तुम कह ठीक रही हो। परंतु मैं तुम्हें छोड़ दूंगा इसकी आशा तुम बिल्कुल न रखना।” बुलबुल यह सुन उदास हो गई फिर कुछ सोचकर वह बाज से बोली,” सारे संसार में आप जैसा कोई दूसरा शिकारी नहीं है।

आप अवश्य ही अपने लिए एक बड़ा और अच्छा शिकार पकड़ लेंगे।” कुछ समय सोचने के बाद बाज बोला,” छोटी चिड़िया! क्या तुम मुझे मुर्ख समझती हो। जो मेरे पास नहीं है उसके लिए, जो मेरे पास है मैं उसे नहीं छोड़ सकता। क्या पता बाद में मुझे कोई बड़ा शिकार मिले या नहीं मिले।” ऐसा कहकर बात बुलबुल को खा गया।

अतः कल के लिए अपने आज को गवाना मूर्खता है।

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