बुरे का अंत बुरा

- Advertisement -

More articles

- Advertisement -

बुरे का अंत बुरा:– बहुत समय पहले एक नगर में चार चोर रहते थे। एक बार चारों ने मिलकर एक सेठ के घर चोरी की। परंतु पकड़े जाने के भय से वह चोरी का माल लेकर जंगल में भाग गए। दो दिन तक वे भूखे प्यासे जंगल में छिपे रहे। जब उन्हें सताने लगे तो उन्होंने यह फैसला किया कि उनमें से दोसा की शहर जाकर वहां का माहौल देख आए तथा साथ ही खाना भी लेते आए।

बुरे का अंत बुराबुरे का अंत बुरा

ऐसा सोचकर उनमें से दो चोर शहर की ओर चल दिए। चारों चोर बड़े दुष्ट थे। उनमें से प्रत्येक पूरा माल खुद हड़प करना चाहता था। शहर जाते हुए रास्ते में एक चोर ने दूसरे से कहा,” यदि यह माल सिर्फ हम दोनों में बटता तो कितना अच्छा होता।” दूसरे ने भी उसकी हां में हां मिलाते हुए कहा,” यदि तुम साथ दो तो हम दोनों मिलकर अपने साथियों को रास्ते से हटा सकते हैं।”

शहर जाकर दोनों चारों ने खूब जमकर खाया और अपने अन्य दो साथियों को मारने की योजना बनाकर खाने में जहर मिला दिया तथा जंगल की ओर चल दिए। जंगल वाले दोनों चोर भी अपने अन्य दोनों साथी की तरह ही उनको मार कर खुद माल हड़पना चाहते थे। अतः वे झाड़ियों में छुप कर बैठ गए और जैसे ही उनके साथ ही खाना लेकर पहुंचे, उन्होंने उन्हें चाकू से मार डाला।
फिर दोनों ने निश्चित होकर धन समेटा और खाना खाने लगे। जहर मिला खाना खाते ही वह दोनों चोर भी मर गए।

अतः बुरे कर्मों का फल बुरा होता है।

- Advertisement -

MOST POPULAR ARTICLES

TRENDING NOW

Latest

- Advertisement -