मंत्रियों से बुद्धिमान गधा

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मंत्रियों से बुद्धिमान गधा:- एक धोबी भी अपने गधे के साथ घाट से कपड़े धो कर घर जा रहा था। मार्ग में कुछ लोग उन दोनों का मजाक उड़ाने लगे। “देखो, एक मूर्ख दूसरे मूर्ख पर बैठकर जा रहा है।” एक व्यक्ति बोला। यह सुनकर सभी जोर-जोर से हंसने लगे।

मंत्रियों से बुद्धिमान गधा

धोबी पापी दिनों से उन लोगों की ऐसी व्यंग्य भरी बातें सुन रहा था। वह गधे से नीचे उतरकर आया और बोला,” मुझे जो कहना है कह लो परंतु मेरे घर है को कुछ ना कहना। मेरा गधा तो राजा के मंत्रियों से भी अधिक बुद्धिमान है।” धोबी की बात सुनकर सभी लोग सकते में आ गए। धीरे-धीरे बात उड़ती हुई राजा व मंत्रियों के कानों तक पहुंची। राजा ने धोबी को दरबार में बुलवाया। राजा के सामने प्रस्तुत होने पर राजा ने धोबी से ऐसा कहने का कारण पूछा।

धोबी बोला,” महाराज! एक दिन मैं नदी पर बना लकड़ी का पुल पार कर रहा था। मेरे गधे का पैर फूल की एक दराज में फंस गया। उस समय मैंने बड़ी मुश्किल से उसका पैर दराद से बाहर निकाला। परंतु अब जब भी मेरा गधा उस पुल को पार करता है, उस स्थान पर पहुंचकर अधिक सतर्क हो जाता है।” फिर धोबी थोड़ा सकूचाते हुए बोला,” परंतु महाराज! आपके मंत्री तो राज्य का खजाना लुटाते समय बिल्कुल भी सतर्क नहीं रहते। जिस समस्या में एक बार फंसते हैं, दोबारा भी उसी समस्या में फंस जाते हैं।

अतः हुआ ना मेरा गधा आप के मंत्रियों से अधिक बुद्धिमान?” यह सुनकर मंत्रियों का सिर शर्म से झुक गया।
अतः जानवर भी समझदार होता है।

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