मदारी और उसका बंदर

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मदारी और उसका बंदर:- एक मदारी के पास एक बंदर था। जिसे लेकर मदारी सड़कों पर खेल दिखाया करता था। लोगों को हंसाने के लिए बंदर कभी नाच दिखाता तो कभी तरह-तरह के करतब करता। जब दर्शक खेल देखने के बाद खुश होकर पैसे फेंकते तो बंदर उन्हें इकट्ठे करके अपने मालिक को देता था।

मदारी और उसका बंदर

गांव तथा शहरों में अपने खेल दिखाते हुए घूमते समय एक दिन एक चिड़िया घर के समीप से गुजरे। वहां बंदर के पिंजरे में एक-दूसरे बंदर को देखा। बंदर के पिंजरे को बच्चों ने घेरा हुआ था। वे बंदर को मिठाई, फल तथा बिस्कुट खिला रहे थे। मदारी का बंदर पिंजरे के बंदर को देखकर सोचने लगा,” यह बंदर कितना भाग्यशाली है।

इसे कोई काम नहीं करना पड़ता। सारा दिन मजे में मिठाई व फल खाता है तथा आराम से सोता रहता है।” उसी रात बंदर अपने मालिक का घर में पिंजरे में आकर रहने लगा। वहां उसे खाने पीने रहने तथा खेलने का पूरा आराम था। परंतु शीघ्र ही वह इस प्रकार खाली बैठे रह कर खाने पीने से तंग आ गया। बिना काम अकेले पिंजरे में पड़े रहकर आने जाने वालों का इंतजार कड़ना उसे अच्छा नहीं लगता था। अतः बंदर पिंजरा छोड़ कर वापस अपने मालिक के पास लौट आया। अपने बंदर को दोबारा पाकर मदारी की आंखों में से खुशी के आंसू झलक पड़े।

काम करना कठिन अवश्य हो सकता है परंतु बेकार बैठना अंत की ओर जाना है।

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