मूर्ख कौन

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मूर्ख कौन:- सेठ किशनलाल एक धनी हीरो का व्यापारी था। एक दिन किसी काम से शहर जाते हुए एक गहनों की दुकान लेकर वह रुक गया क्योंकि उस दुकान के शोकेस में एक सच्चा हीरा रखा था।
उसने दुकानदार के पास पहुंच कर उस हीरे की कीमत पूछी। दुकानदार बोला,” इसकी कीमत दो हजार रुपए हैं।” सेठ किशनलाल ने दुकानदार से वह हीरा उसे एक हजार रुपए में देने को कहा। परंतु दुकानदार ने एक हजार में हीरा उसे नहीं बेचा।

मूर्ख कौन

किशनलाल ने यह सोचकर हीरा छोड़कर चला गया कि शाम को आते हुए दोबारा दुकानदार से दाम पूछूंगा। तब शायद वह यह हीरा एक हजार में दे दें।
शाम को किशनलाल फिर से हीरे के बारे में पूछने आया तो दुकानदार बोला,” मैंने वह हीरा पांच हजार रुपये में बेच दिया है।”

यह सुनकर किशनलाल बोला,” अरे मूर्ख! वह सच्चा हीरा था। उसकी कीमत तो पचास हजार रुपए होगी। और तुमने केवल पांच हजार में बेच दिया। तुम बड़े मूर्ख हो।” दुकानदार ने किशनलाल की बात सुनकर उत्तर दिया,” मुझे तो यह मालूम नहीं था कि हीरा असली है, परंतु तुम तो जानते थे। फिर तुमने उसे दो हजार में भी क्यों नहीं खरीदा? मुझसे बड़े मूर्ख तो तुम हो।”

अतः बड़े फायदे के लिए छोटा नुकसान सहन कर लेना चाहिए।

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