मूर्ख मेंढक

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मूर्ख मेंढक:- एक बार की बात है, दो मेंढक थे। एक मेंढक ने अपना घर तालाब के किनारे बना रखा था। जबकि दूसरा मेंढक सड़क के किनारे फुटपाथ पर अपना घर बनाकर रहता था। एक दिन तालाब के मेंढक ने दूसरे मेंढक से कहा,” प्रिय मित्र! तुम तालाब में आकर मेरे साथ रहो।

मूर्ख मेंढकमूर्ख मेंढक

सड़क के किनारे सड़क के किनारे रहना बहुत खतरनाक है। कभी-कभी कोई रतमान अथवा गाड़ी वाला फुटपाथ पर भी अपनी गाड़ी चढ़ा देते हैं। कहीं कभी तुम्हारे साथ कोई दुर्घटना ना हो जाए।”
यह सुनकर दूसरा मेंढक बोला,” अरे , नहीं नहीं! मैं तो इस विषय में सोचता ही नहीं। मैं इस स्थान को नहीं छोड़ सकता। यहां तो मैं वर्षों से रह रहा हूं, सो मैं तो इसी स्थान पर रहूंगा।”
दुर्भाग्यवश, कुछ दिनों बाद ही एक रात अचानक सड़क से पगडंडी पर उतर गया। रथ के पहिए के नीचे आकर दूसरे मेंढक की मौत हो गई। तालाब के मेंढक को अपने मूर्ख मित्र की मृत्यु का बहुत दुख हुआ।

अतः सही कहा गया है कि संभावित दुर्घटना का विचार कर उसका निराकरण पहले ही कर ले। यह आवश्यक तो नहीं कि जो दुर्घटना अभी तक नहीं हुई, वह आगे भी नहीं होगी। यदि पगडंडी वाला मेंढक उस स्थान को छोड़कर तालाब में चला गया होता तो शायद उसका इतना दुखद अंत नहीं होता।

अतः बुद्धिमान की सलाह को अवश्य मानना चाहिए।

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