मेहनत रंग लाई

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मेहनत रंग लाई:- एक बार कुछ मछुआरे मिल समुद्र में मछलियां पकड़ने गए उनका नेता एक बूढ़ा परंतु बुद्धिमान मछुआरा था उन्होंने एक बड़ा जाल समुंद्र में डाल दिया कुछ समय बाद ही उन्हें जाल भारी लगने लगा

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वह सब यह सोच कर कि उनके जाल में बहुत सारी मछलियां फस गई पूरी शक्ति से जाल खींचने लगे परंतु जैसे ही जाल खींचकर ना ऊपर चढ़ाया तो पाया की जाल में केवल कुछ छोटी-छोटी मछलियां फंसी है तथा जहाज के टूटे हुए टुकड़े तथा मलबे, काफी मात्रा में जाल में फंस गए थे जिसके कारण जाल भारी हो गया था। यह देखकर मछुआरों के खिले हुए चेहरे मुरझा गए। हिम्मत हार कर वह जाल को पानी में छोड़ने लगे।

तभी एक बूढ़े मछुआरे ने कहा,” हिम्मत मत हारो! जान को पूरा पानी से बाहर खींचो तथा दोबारा जाल डालो। हमें अवश्य सफलता मिलेगी।” अपने नेता की बात मानकर सभी मछुआरों ने मिलकर जाल को नाव पर चढ़ाया। जाल में से मलवा हटाते समय उन्हें उसके अंदर एक संदूक मिला जिसमें स्वर्ण मुद्राएं गहने तथा हीरे-जवाहरात थे। उन्होंने संदूक के सामान को बराबर-बराबर बांट लिया।

अतः किसी भी कार्य को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए।

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