मौका बार-बार नहीं मिलता

- Advertisement -

More articles

- Advertisement -

मौका बार-बार नहीं मिलता:- राजा सूरजमल के राज्य में प्रजा बहुत खुश थी। शहर में अमन चैन व खुशहाली थी। मगर एक दिन राजधानी में एक चोर आ गया। वह सीधे सादे लोगों को ठगता और गायब हो जाता। शीघ्र ही चोर का आतंक चारों तरफ फैल गया। लोगों ने राजा से शिकायत की।

मौका बार-बार नहीं मिलता

राजा के गुप्त चरो ने चोर के लिए जाल बिछाया तथा कुछ ही दिनों में उसे पकड़ लिया। चोर एक नंबर का धूर्त और चालाक था वह राजा से शमा याचना करने लगा और उनके कदमों में गिर पड़ा।
राजा को चोर पर दया आ गई। उन्होंने उसे सुधरने का एक मौका देकर छोड़ दिया। चोर ने तुरंत राजधानी छोड़ दी तथा पास के एक गांव की और चल पड़ा।मार्ग में उसे एक व्यापारी। मिला उसने व्यापारी को लूट कर उसे कुएं में डाल दिया। जैसे ही वह वापस मुड़ा अचानक उसका पैर फिसल गया तथा उसका सिर एक पत्थर से जा टकराया और वह बेहोश हो गया।
कुछ समय पश्चात सिपाही वहां से गश्त करते हुए निकले। उन्होंने व्यापारी को कुएं से बाहर निकाला तथा चोर को भी पकड़ कर राजा के पास ले आए।

जब राजा को मालूम हुआ कि चोर ने दोबारा किसी व्यक्ति को ठगा है, वह बहुत क्रोधित हुए। चोर ने राजा से फिर क्षमा मांगी। परंतु इस बार राजा ने उसे क्षमा ना करते हुए कहा,” जो एक बार नहीं सुधर सकता, वह कभी नहीं सुधर सकता। पता है इससे कारागार मैं डाल दो।”

सुधरने का मौका बार-बार नहीं मिलता

- Advertisement -

MOST POPULAR ARTICLES

TRENDING NOW

Latest

- Advertisement -