राजा की दवाई

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राजा की दवाई:- उदयपुर का राजा सूरजभान बहुत आलसी व सुस्त था। दिन भर पड़े पड़े खाते रहना उसकी आदत थी। अतः वह अक्सर बीमार रहने लगा।

राजा की दवाई

एक दिन राजा ने राजवैद्य को बुलाकर आदेश दिया,” वैद्य जी, कोई ऐसी दवा दीजिए जिससे मैं ठीक हो जाऊं अन्यथा आप को मृत्युदंड दिया जाएगा।” राजवैद्य जानते थे कि महाराज का इलाज दवाई नहीं अपितु व्यायाम है। अतः उन्होंने कसरत के डंबल बनाकर राजा को देते हुए कहा,” महाराज! यह जादुई गोले आपको स्वस्थ बना देंगे। बस इन्हें हाथ में पकड़ कर दोनों हाथों को तेजी से आगे पीछे तब तक रुलाते रहना है, जब तक हाथों में पसीना ना आ जाए। यदि पसीना नहीं आया तो जादुई दवा असर नहीं करेगी।”

राजा ने वैसा ही किया। शुरू के कुछ दिन तो उन्हें कसरत करने में परेशानी हुई, परंतु जैसे-जैसे समय बीतता गया महाराज को अपने शरीर में स्फूर्ति महसूस होने लगी। एक महीने के अंदर ही वह पूरी तरह स्वस्थ व तंदुरुस्त हो गए।

राजा ने वैद्यजी को बुलाकर पुरस्कृत किया तथा उन बोलो का राज पूछा। वैद्य जी ने चतुराई से उत्तर दिया,” महाराज! यह जादुई बोले हैं। अतः आप जब तक रोज इन्हें रुलाते रहेंगे, स्वस्थ रहेंगे। जब आप इन्हें जुलाना बंद कर देंगे, आप बीमार पड़ जाएंगे।”
तब से राजा गोलू को रोजाना हाथों में पकड़ कर झुलाने लगा।

अतः यह सही है कि जिसे जैसे समझ में आए उसे वैसे ही समझाना चाहिए।

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