रामदेव जयंती 2021 महत्व तथा मान्यताएं

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पांच पीर

रामदेव जयंती 2021 महत्व तथा मान्यताएं

रामदेव जयंती 2021 महत्व- चौदहवीं शताब्दी के शासक, रामदेव ने कहा है कि उन्होंने गरीबों और दलितों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। यह भी मान्यता है कि उनके पास चमत्कारी शक्तियां थी। देश में कई समूह द्वारा इष्ट देवता के रूप में पूजे जाने वाले, उन्हें भगवान कृष्ण का अवतार भी मानते हैं। 

हिंदू माह भाद्रपद के शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन रामदेव जयंती मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह अगस्त या सितंबर के महीने में पड़ता है। इस वर्ष यह तिथि (रामदेव जयंती) 28 अगस्त, 2020 शुक्रवार को मनाई जाएगी।

रामदेव जयंती का उत्सव

इस दिन लोग श्रद्धा और समर्पण के साथ बाबा रामदेव की पूजा करते हैं। भक्त उनकी पूजा करने के लिए उनके मंदिरों में जाते हैं, नए कपड़े और विशेष भोजन के साथ लकड़ी के घोड़े के खिलौने पेश करते हैं। रामदेव के विश्राम स्थल रामदेवरा मंदिर में विशेष प्रार्थनाएं की जाती है। एक मेगा फेस्ट का आयोजन भी किया जाता है। जहां सभी धर्म, समुदायों के लोग हिस्सा लेते हैं।

रामदेव जी, बाबा रामदेव, रामदेव पीर, रामसा पीर आदि नामों से हिंदू लोक देवता रामदेव जी को जाना जाता है। उन्हें समाज के कई धर्मों के लोगों द्वारा पूजा जाता है। भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं।

रामदेव जी को कल्कि अवतार के रूप में विष्णु का अवतार माना जाता है। राजा अजमल ने चहन बरु गांव के पंपी भाटी की बेटी रानी मीनल देवी से शादी की। नि:संतान राजा द्वारका गए और कृष्ण से उनकी तरह संतान प्राप्ति की कामना की। उनके दो बेटे वीरमदेव और छोटे रामदेव थे। रामदेव का जन्म बाड़मेर जिले के रामदेरिया, उंडू और कश्मीर में एक राजपूत परिवार में वीएस 1405 में भद्रा शुक्ला दूज में हुआ था।

रामदेव जयंती 2020

राजस्थान में रामदेव जी मेघवाल जयपाल समुदाय की मुख्य देवता है। वैधवा पूनम सितंबर अगस्त के दौरान पूजा की जाती है। समुदाय के धर्मगुरु गोकुलदास का दावा है कि 1982 की उनकी पुस्तक मेघवाल इतिहास में रामदेव खुद मेघवाल जयपाल थे। जो मेघवाल समुदाय के इतिहास का निर्माण करता है। हालांकि यह केवल समुदाय मेघवाल समुदाय द्वारा स्वयं स्वीकार किया गया दावा है।

रामदेव जयंती महत्व तथा मान्यताएं

मुसलमान रामदेव को रामसापीर  के रूप में मानते हैं। कहा जाता है कि उनके पास चमत्कारी शक्तियां थी और उनकी ख्याति दूर-दूर तक थी। किंवदंती है कि मक्का से पांच पीर रामदेव जी की शक्ति का परीक्षण करने आए थे। 

रामदेव ने उनका स्वागत किया उनसे अपने साथ दोपहर का भोजन करने का अनुरोध किया उसने यह कहते हुए मना कर दिया कि वे केवल अपने निजी बर्तनों के साथ ही भोजन करते हैं,जो मक्का में थे।

इस पर रामदेव जी ने मुस्कुराते हुए कहा कि देखो तुम्हारे बर्तन आ रहे हैं। और उन्होंने देखा कि उनके खाने के कटोरे मक्का से हवा में उड़ते हुए आ रहे हैं। उनकी क्षमता और शक्तियों के बारे में आश्वस्त होने के बाद उन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनका नाम रामशाह पीर रखा।

पांच पीर उनकी शक्तियों का परीक्षण करने के लिए आए, उन से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उनके साथ रहने का फैसला किया, रामदेव जी समाधि के पास उनकी कब्र स्थित है। रामदेवजी सभी मनुष्य की समानता में विश्वास करते थे, वह ऊंच-नीच अमीर हो या गरीब हो।

उन्होंने उन्हें अपनी इच्छाएं बताकर डाउन ट्राडन की मदद की। उसे अक्सर घोड़े की पीठ पर चित्रित किया गया जाता है। उनके अनुयाई राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, मध्यप्रदेश,‌ मुंबई, दिल्ली, पाकिस्तान के सिंध में भी फैले हुए हैं। राजस्थान में कई मेलों का आयोजन किया जाता है । उनके नाम के मंदिर भारत के कई राज्यों में पाए जाते हैं।

रामदेव जी की समाधि

रामदेव जी ने 37 वर्ष की आयु में वीएस 1442 में भाद्रपद शुक्ल एकादशी पर राजस्थान के रामदेवरा पोखरण से 10 किलोमीटर पर समाधि ली। दलीबाई मेघवाल समुदाय के उनके अनुयाई हैं। उन्हें भी उनकी कब्र के पास दफनाया गया और कहा जाता है कि उन्होंने रामदेव से 2 दिन पहले समाधि ली थी।

इस मंदिर परिसर में डाली बाई और उनके कुछ अन्य प्रमुख शिष्यों की तरह उनके शिष्यों की भी समाधि बनी हुई है। इस परिसर में 5 मुस्लिम पीरों की कब्र भी है, जो मक्का से आए थे। इसमें एक सोतेला कुआं भी है, जिसके जल के बारे में श्रद्धालुओं का मानना है कि इसमें चिकित्सा शक्तियां हैं।

बाबा रामदेव जी का विशाल मंदिर जैसलमेर के रुणिचा में फैला हुआ है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु ने नमन करने आते हैं। रामदेव जी सामुदायिक सद्भाव और अमन के प्रतीक हैं। बाबा का अवतरण विक्रम संवत 1409 को भाद्रपद शुक्ल दूज के दिन तोमर वंश राजपूत और रुणिचा के शासक अजमल जी के घर हुआ। उनकी माता का नाम मीणादे मीनल देवी था।

बाबा का संबंध राजवंश से था, लेकिन उन्होंने पूरा जीवन शोषित गरीब और पिछड़े लोगों के बीच बिताया। उन्होंने रूढ़ियों और छुआछूत का विरोध किया। भक्तों उन्हें प्यार से रामसा पीर या रामापीर भी कहते हैं। बाबा को श्रीकृष्ण का अवतार मानते हैं। वे हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक माने जाते हैं । भक्तों का उनके प्रति समर्पण इतना है, कि पाकिस्तान से मुस्लिम भक्त भी उन्हें नमन करने भारत आते हैं।

इस वर्ष रामदेव जयंती 16 सितम्बर, 2021 गुरूवार को मनाई जाएगी।

रामदेव जयंती भाद्रपद शुक्ल दशमी को मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन बाबा रामदेव ने जीवित समाधि ली थी। यह समाधि स्थल राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण तहसील के पास 10 किलोमीटर दूर रामदेवरा में स्थित है।

रामदेवरा में हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल दशमी को विशाल मेला आयोजित किया जाता है। भादों सुदी दो से भादों सुदी ग्यारस तक यहां प्रतिवर्ष एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें रामसापीर के लाखों भक्त पहुंचते हैं। इस अवसर पर कामड जाति की स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला ‘तेरहताली नृत्य’ विशेष आकर्षण होता है। यह लोग रामदेव जी के भोपे होते हैं।

मेले के दौरान बाबा के मंदिर में दर्शन के लिए 4 से 5 किलोमीटर लंबी कतारें लगती है और जिला प्रशासन के अलावा विभिन्न स्वयंसेवी संगठन दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए नि:स्वार्थ भोजन पानी और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। श्रद्धालु पहले जोधपुर में बाबा के गुरु के मसूरिया पहाड़ी स्थित मंदिर में भी दर्शन करना नहीं भूलते।

रामदेव जयंती 2020

श्री रामदेव जी की आरती

पिछम धरासूं मारा पीरजी पधारिया।
घर अजमल अवतार लियो।
लाछां सुगणा करें थारी आरती।

हरजी भाटी चंवर डोले।
गंगा जमुना बहे सरस्वती।
रामदेव बाबू स्नान करें।
लाछां सुगना करे थारी आरती।

घिरत मिठाई बाबा चढ़े थारे चूरमा।
धुपारी महकार पड़े।
लाछां सुगना करे थारी आरती।

ढोल नगाड़ा बाबा नौबत बाजे।
झालर री झंकार पड़े।
लाछां सुगणा करें थारी आरती।

दूर-दूर सुं आवे थारे जातरू।
दरगा आगे बाबा नीवाण करें।
लाछां सुगणा करें थारी आरती।

हरि सरणें भाटी हरजी बोले।
नवों रे खंडों में निशान घूरें।
लाछां सुगणा करें थारी आरती।
जय बाबा रामदेव

रामदेव जयंती 2021

इस वर्ष रामदेव जयंती 16 सितम्बर, 2021 गुरूवार को मनाई जाएगी।

रामदेव जी किसके अवतार थे?

भगवान रामदेव जी भगवान श्री कृष्णा के अवतार थे

रामदेव जी का मंदिर कहां स्थित है?

रामदेव जी का मंदिर जैसलमेर के पोखरण के पास रुणीजा में है।

रामदेव जी को किन नामों से पुकारा जाता है?

रामदेव जी को राम सा पीर बाबा रामदेव रामदेव पीर आदि नामों से पुकारा जाता है।

रामदेव जी का जन्म कब हुआ था?

रामदेव जी का जन्म विक्रम संवत 1405 में भद्रा शुक्ला दूज को हुआ था।

रामदेव जी के माता- पिता का नाम क्या था?

रामदेव जी की माता का नाम मीनल दे तथा पिता का नाम अजमल था।

रामदेव जी की समाधि कहां है?

रामदेव जी की समाधि रामदेवरा (जैसलमेर) में है।

रामदेव जी ने समाधि कब ली थी?

रामदेव जी ने समाधि भाद्रपद शुक्ल दशमी को ली थी।

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