लापरवाही का फल बुरा होता है

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लापरवाही का फल बुरा होता है:- एक गडरिया के पास बहुत सी भेड़ बकरियां थी। उनकी देखभाल के लिए उसने दो कुत्ते पाल रखे थे। दोनों कुत्ते भेड़ बकरियों की बहुत वफादारी से रखवाली करते थे। एक रात एक भेड़िया एक भेड़ को पकड़ने के लिए बाड़े के नजदीक आया।

परंतु कुत्तो के भोंकने कारण उसे वापस जाना पड़ा। तब वह कुत्तों को बाड़े से दूर करने का उपाय सोचने लगा। अगली सुबह वह भेड़िया कुत्तों के पास पहुंचा। और उनसे मित्रता बढ़ाने की कोशिश करने लगा। उसने दया दिखाते कुत्तों से कहां भाइयों मैं तुम्हारी इतनी दयनीय अवस्था देखकर बहुत दुखी हूं।

लापरवाही का फल बुरा होता है

तुम्हें दिन रात हर समय काम करते देखता हूं तो दुख होता है। मुझे देखो मैं तो दिन भर जंगल में आजाद होकर घूमता हूं। दोनों बेवकूफ़ कुत्ते भेड़िए की बातों में आ गए और रखवाली करने का काम छोड़कर भेड़िये के साथ जंगल में चले गए। भेड़िया यही तो चाहता था। वह दोनों कुत्तों को अपनी मांद में ले गया।

तथा वहां अन्य भेड़ियों के साथ मिलकर उसने दोनो को मार डाला। फिर भेड़िया वापस भेड़ो के बाड़े में आया और सारी भेड़ो को मार कर कहा गया। इस प्रकार कुत्तों की गैर जिम्मेदारी ने न केवल मालिक का नुकसान करवाया अपितु स्वयं की भी जान से हाथ धोना पड़ा।

दुष्ट कहीं न कहीं अपनी चालाकी अवश्य दिखाता है।

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