लोमड़ी का बदला

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लोमड़ी का बदला:- एक बार एक लोमड़ी ने खेत में उगे एक कद्दू को तोड़कर खा लिया।खेत के मालिक को बहुत क्रोध आया। उसने लोमड़ी का पीछा करके उसे पकड़ लिया। लोमड़ी किसान से क्षमा मांगने लगी परंतु किसान का हद नहीं पिघला। गुस्से में किसान ने लोमड़ी की पूंछ पर तेल से भीगा हुआ कपड़ा लपेट कर आग लगा दी।

लोमड़ी का बदलालोमड़ी का बदला

आग लगाने से लोमड़ी की पूछ जलने लगी। अब उसने किसान से बदला लेने की सोची। वह किसान के दूसरे खेत की तरफ दौड़ी। वह खेत गेहूं का था, जहां फसल पूरी तरह से पक चुकी थी। केवल उसे काटकर गेहूं अलग करना शेष था। वहां जाकर लोमड़ी ने अपनी जले हुए पूछ से गेहूं के पूरे खेत में आग लगा दी।

जल्दी ही सुखी फसल ने आग पकड़ ली तथा पूरा खेत जलकर राख हो गया। किसान को अपनी गलती का अहसास हुआ। पहले तो उसे केवल एक कद्दू का ही नुकसान हुआ था।परंतु अपने क्रोध के कारण उसे हजारों रुपए की फसल का भी नुकसान हो गया था। यह देखकर वह अपना सिर पीटने लगा। और सोचने लगा कि यदि वह लोमड़ी को शम्मा कर देता तो शायद यह नौबत न आती।

अतः किसी की छोटी सी भूल के लिए उसे क्षमा कर देना ही उचित है।अतः क्षमा सबसे बड़ा दान है।

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