व्यवहार कुशलता

- Advertisement -

More articles

- Advertisement -

व्यवहार कुशलता:- एक नगर में एक धनवान परंतु सनकी बुढ़िया रहती थी। एक बार उसने एक चित्रकार से अपना चित्र बनवाया। एक माह बाद जब चित्र तैयार हो गया तो वह उस चित्र को लेने के लिए चित्रकार के पास पहुंची। उसके साथ उसका कुत्ता भी था।

व्यवहार कुशलताव्यवहार कुशलता

चित्रकार ने चित्र बहुत ही सुंदर बनाया था। बुढ़िया ने चित्र की तरफ इशारा करते हुए अपने कुत्ते से कहा,” शेरू, देखो तो यह तस्वीर कैसी बनी है?” परंतु कुत्ते ने तस्वीर की और देखा तक नहीं।
सनकी बढ़िया चित्रकार से बोली,” तुमने मेरा चित्र सही नहीं बनाया। जब मेरा कुत्ता ही मुझे नहीं पहचान रहा तो और कौन मुझे पहचानेगा। मैं यह चित्र नहीं लूंगी। तुम्हें दूसरा चित्र बनाना होगा।”
चित्रकार ने बुढ़िया को बहुत समझाया। परंतु बुढ़िया कुछ भी सुनने समझने के लिए तैयार नहीं थी। अंत में कुछ देर सोचने के बाद चित्रकार बोला,” बहन जी! आप कल अपना चित्र ले जाएं। मुझे अपनी गलती का पता चल गया है।”

अगले दिन चित्रकार ने एक मां का टुकड़ा चित्र के नीचे किनारे पर रगड़ दिया। जैसे ही बुढ़िया अपने कुत्ते के साथ स्टूडियो में दाखिल हुई, कुत्ता दौड़ कर चित्र को चाटने लगा।
यह देखकर बुढ़िया ने चित्रकार को चित्र के मुंह मांगे पैसे दिए।

व्यक्ति को व्यवहार कुशल होना भी आवश्यक है।

- Advertisement -

MOST POPULAR ARTICLES

TRENDING NOW

Latest

- Advertisement -