व्यवहार बदले, शरीर नहीं

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व्यवहार बदले, शरीर नहीं:- एक समय की बात है। एक बिल्ली एक दूरदर्शन युवक को देखकर उससे प्रेम करने लगी। परंतु एक बिल्ली का एक युवक से कैसे विवाह हो सकता है। अतः उसने ईश्वर से प्रार्थना कि। ईश्वर ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर उससे एक सुंदर युवती में परिवर्तित कर दिया। सुंदर युवती को देख कर वह युवक भी उस प्रेम करने लगा तथा कुछ दिनों के पश्चात उन दिनों का विवाह हो गया।

व्यवहार बदले, शरीर नहीं

नवदंपति को आराम के लिए एक कमरे में ठहराया गया। ईश्वर युवती बनी के स्वभाव की परीक्षा लेना चाहता था। अतः ईश्वर ईश्वर ने कमरे में एक चूहा भेजा।
चूहे को देखते ही युवती बनी बिल्ली सब कुछ भूलकर चूहे का पीछा करने लगी तथा थोड़ी देर में उसे पकड़ लिया। चूहे का पीछा करते समय वह यह भी भूल गई थी कि वह अब युवती है, बिल्ली नहीं। ईश्वर युवती बनी बिल्ली के इस व्यवहार से बहुत दुखी हुई और बोले,” युवती बनने के बाद भी तुम्हारा स्वभाव बिल्ली का ही है। अतः उचित यही है कि तुम बिल्ली ही बनी रहो।” इतना कहते ही ईश्वर ने उस युवती को वापस बिल्ली बना दिया। वास्तव में शरीर या वस्त्रों के बदल जाने से किसी चरित्र अथवा व्यवहार में बदलाव नहीं आता।

अतः व्यक्ति का मूल स्वभाव जैसा है, वैसे ही रहेगा।

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