सेर का सवा सेर

सेर का सवा सेर:- एक बार एक नाई को किसी आवश्यक काम से शहर जाना पड़ा। रास्ते में एक घने जंगल को पार करना पड़ता था। उसे जंगल में जंगली जानवरों का डर था। वह बहुत संभलकर जंगल पार कर रहा था। जंगल का दूसरा किनारा अभी थोड़ी दूर था कि अचानक उसके सामने जंगल का राजा शेर पहुंच गया।

सेर का सवा सेरसेर का सवा सेर

शेर को देखते ही उसके पसीने छूट गए। परंतु हिम्मत रखते हुए वह आगे बढ़ा। शेर को नाई के व्यवहार से बहुत हैरानी हुई क्योंकि उसको तो देखने मात्र से ही लोग भयभीत हो जाते थे। परंतु वह व्यक्ति निर्भय होकर उसकी तरफ आ रहा था। शेर के पास पहुंचकर नाई बोला,”अच्छा, तुम यहां छुपे हो और मैं तुम्हें जंगल में ढूंढ रहा था।”नाई की बात सुनकर शेर डर गया। वह बोला,”तुम मुझे किस लिए ढूंढ रहे थे?”शेर को इस तरह डरते देख नाई की हिम्मत बढ़ गई

वह जोश से बोला,”राजा ने मुझे दो शेर पकड़कर लाने को कहा था। एक तो मैं पकड़ चुका हूं, दूसरे तुम हो जो यहां आराम से घूम रहे हो और मैं ढूंढ़ते –ढूंढ़ते परेशान हो गया।”ऐसा कहते हुए मैंने अपने सामान में से शीशा निकाल कर शेर को दिखाया। शेर ने शीशे के अंदर अपने प्रतिबिंब को दूसरा शेर समझा  था शेर डर के कारण वहां से तुरंत भाग गया। इस प्रकार बुद्धिमानी से नाई ने अपनी जान बचा ली। तभी तो कहते हैं कि सेर को सवा सेर मिल ही जाता है