हम अपने को कभी नहीं देखते

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हम अपने को कभी नहीं देखते:- दो व्यक्ति एक सराय में रात गुजारने के लिए रूके। सराय में अधिक भीड़ होने के कारण सराय के मालिक ने दोनों को एक ही कमरे में ठहरा दिया। पहला व्यक्ति हीरे का व्यापारी था तो उसके पास हिरे व कुछ नकदी थी। दूसरा व्यक्ति चोर था। और हीरे के व्यापारी का पीछा करते हुए सराय में आया था।

हम अपने को कभी नहीं देखते

एक ही कमरा मिलने पर चोर बहुत प्रसन्न हुआ। अब वह अपना काम आसानी से कर सकता था। व्यापारी जब खाना खाने बार गया। तो चोर ने उसके सारे सामान की तलाशी ली। परंतु उसे कहीं भी हीरे नहीं मिले। थक हार कर चोर भी सो गया। सुबह अपनी राह जाते हुए व्यापारी ने चोर को जगाया तथा रात भर उसका साथ देने के लिए धन्यवाद दिया।

चोर ने व्यापारी को उससे पूछा श्रीमान में चोर तथा। मैं आप आपके हीरे चुराना चाहता था। पूरी रात आपके सामान की तलाशी लेता रहा परंतु मुझे हिरे आपके सम्मान में नहीं मिले। क्या आप मुझे इसका कारण बता सकते हैं। इस बात पर व्यापारी हंसते बोला मुझे मालूम था। कि तुम चोर हो इसीलिए हीरे मैंने अपनी सामान रखने के बजाए तुम्हारे सामान में छुपा दिए थे। क्योंकि हम अपने सामान कभी भी नहीं देखते।

यह सुनकर व्यापारी की बुद्धिमानी का लोहा मान गया। सच ही है कि संकट में बुद्धिमानी से काम लेना चाहिए।

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