Anmol Khajana: अनमोल खजाना

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Anmol Khajana: एक गांव में एक कंजूस पुरोहित था जिसे अपनी चतुराई एवं पांडित्य पर बहुत घमंड था । वह सदैव दूसरों से कहता फिरता था,” तुम्हें धर्म अथवा शिक्षा का ज्ञान नहीं है। तुम्हारा तो जीवन ही व्यर्थ है आदि-आदि।” एक दिन पुरोहित को नदी पार करके दूसरे गांव जाना था। नदी पार करने के लिए पुरोहित नाव पर बैठ गया।

Anmol Khajana: अनमोल खजाना

नाविक ने पुरोहित से जब नाव खेने के पास मांगे तो पुरोहित उससे बोला,” मैं तुम्हें ज्ञान का अनमोल खजाना देना चाहता हूं और तुम मुझसे कुछ पैसे मांग रहे हो।” यह सुनकर नाविक चुप हो गया तब पुरोहित नाविक से बोला,” क्या तुम तुलसीदास को जानते हो?”
” कौन तुलसी दास?” नाविक ने पूछा।
“अरे! तुम इतना भी नहीं जानते। तुम्हारा तो जीवन ही व्यर्थ है।” पुरोहित इसी प्रकार बातें करता रहा। नाविक पुरोहित को सबक सिखाना चाहता था। अतः बीच नदी में जाकर उसने नाव को हिलाना शुरू कर दिया और पुरोहित से बोला,” क्या तुम्हें तैरना आता है?” पुरोहित डर के मारे कांपते हुए बोला,” नहीं नहीं, मुझे तैरना नहीं आता।”

” तब तो आपका जीवन व्यर्थ हो गया” ऐसा कहकर नाविक ने नाव को जोर से झटका दिया जिससे पुरोहित पानी में गिर गया और डूबने लगा। नाविक को पुरोहित पर दया आ गई। उसने तैयार कर पुरोहित की जान बचा ली। पुरोहित ने नाविक से क्षमा मांगी और अपने रास्ते चल दिया।

अतः अपने कार्य का प्रत्येक व्यक्ति को ज्ञान होता है।

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