Chhath Puja 2021- छठ पूजा कब मनाई जाती है

- Advertisement -

More articles

- Advertisement -

Chhath Puja 2021 – छठ पूजा के दिन माता छठी की पूजा की जाती है जिन्हे वेदो के दौरान उषा कहा जाता है जिन्हे शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव की पत्नी भी कहा गया है इस कारण छठ पूजा के दिन सूर्य देवता पुराणों में निकलता है। इस पूजा के माध्यम से भगवान सूर्य का देव को धन्यवाद दिया जाता है।

छठ पूजा

Chhath Puja का महत्व

छठ पूजा के दिन माता छठी की पूजा की जाती है जिन्हें वेदों के अनुसार उनसे कहा जाता है जिन्हें शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव की पत्नी कहा गया है इसलिए इस दिन सूर्य देवता की पूजा का महत्व पुराणों में निकलता है इस पूजा के जरिए भगवान सूर्य का देश को धन्यवाद दिया जाता है। सूर्य देव के कारण ही धरती पर जीवन संभव हो पाया है एवं सूर्य देव की अर्चना करने से मनुष्य रोग मुक्त होता है इन्हीं सब कारणों से प्रेरित होकर यह पूजा की जाती है छठ पूजा दो बार मनाई जाती है पहली है ।

चैती छठ पूजा और दूसरी है कार्तिक छठ पूजा छठ पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्टी को मनाई जाती है यह चार दिवसीय त्यौहार होता है जोकि चौक से सप्तमी तक मनाया जाता है इसे कार्तिक छठ पूजा कहा जाता है इसके अलावा क्षेत्र में भी यह पर्व मनाया जाता है जिसे चैती छठ पूजा कहा जाता है छठ पूजा खासतौर पर उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड एवं नेपाल में मनाई जाती है यह दिन उत्सव की तरह हर्ष के साथ मनाया जाता है।

छठ पूजा कथा व इतिहास

काफी समय पहले एक राजा रानी हुआ करते थे उनकी कोई संतान नहीं थी राजा इससे बहुत ज्यादा दुखी थे महर्षि कश्यप उनके राज्य में आये। राजा ने उनकी सेवा की महर्षि ने आर्शीवाद दिया जिसके प्रभाव से रानी गर्भवती हो गई। परन्तु संतान मृत पैदा हुई जिसके कारण राजा रानी अत्यंत दुखी थे। जिसके कारण दोनों ने आत्महत्या का निर्णय लिया गया।

फिर जैसे ही वह दोनों नदी में कूदने गए उन्हें छठी माता ने दर्शन दिए और यह कहा कि आप मेरी पूजा करे जिससे आपको जरूर अवश्य संतान प्राप्ति होगी। दोनों राजा ने विधि के साथ छठी की पूजा की और उन्हें स्वस्थ संतान की प्राप्ति हुई तब से ही कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को यह पूजा की जाती है।

यह भी पढ़िए: महाशिवरात्रि का पर्व

छठ पूजा व्रत विधि

1 नहाय खाय यह पहला दिन होता हैं. यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होता हैं. इस दिन सूर्य उदय के पूर्व पवित्र नदियों का स्नान किया जाता हैं इसके बाद ही भोजन लिया जाता हैं जिसमे कद्दू खाने का महत्व पुराणों में निकलता हैं.
2 लोहंडा और खरना यह दूसरा दिन होता हैं जो कार्तिक शुक्ल की पंचमी कहलाती हैं. इस दिन, दिन भर निराहार रहते हैं. रात्रि में खिरनी खाई जाती हैं और प्रशाद के रूप में सभी को दी जाती हैं. इस दिन आस पड़ौसी एवम रिश्तेदारों को न्यौता दिया जाता हैं.
3 संध्या अर्घ्य यह तीसरा दिन होता हैं जिसे कार्तिक शुक्ल की षष्ठी कहते हैं. इस दिन संध्या में सूर्य पूजा कर ढलते सूर्य को जल चढ़ाया जाता हैं जिसके लिए किसी नदी अथवा तालाब के किनारे जाकर टोकरी एवम सुपड़े में  देने की सामग्री ली जाती हैं एवम समूह में भगवान सूर्य देव को अर्ध्य दिया जाता हैं. इस समय दान का भी महत्व होता हैं. इस दिन घरों में प्रसाद बनाया जाता हैं जिसमे लड्डू का अहम् स्थान होता हैं.
4 उषा अर्घ्य यह अंतिम चौथा दिन होता हैं. यह सप्तमी का दिन होता हैं. इस दिन उगते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता हैं एवम प्रसाद वितरित किया जाता हैं. पूरी विधि स्वच्छता के साथ पूरी की जाती हैं.

छठ व्रत के नियम

  • इस पूजा में घर की महिलाये और पुरुष दोनों बैठते है।
  • इन चार दिनों में व्रत करने वाला धरती पर सोता हैं जिसके लिए कम्बल अथवा चटाई का प्रयोग कर सकता हैं।
  • इन दिनों घर में प्याज लहसन एवम माँस का प्रयोग निषेध माना जाता हैं।
  • इसमें अचे और नए कपडे पहने जाते है जिसमे सिलाई न हो जैसे महिलाये साड़ी और पुरुष धोती पहन सकते है।

- Advertisement -

MOST POPULAR ARTICLES

TRENDING NOW

Latest

- Advertisement -