Doctor Frog: डॉक्टर टर्र-टर्र

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Doctor Frog:- एक दिन एक तालाब मैं एक नया मेंढक आया ।वह नए स्थान पर रहने वाले सभी जानवरों से मिलना चाहता था ।साथ ही वह उन पर अपना रोग भी जमाना चाहता था ।अतः वह एक छोटी चट्टान पर चढ़कर ऊंची आवाज में टर्राने लगा ,”दोस्तों यहां आओ। मैं स्थान पर नया आया हूं । मैं आप सब से मिलना चाहता हूं।” उसकी आवाज को सुनकर सभी जानवर तालाब के पास एकत्र हो गए ।सभी जानवरों को एकत्र देखकर मेंडक बोला,” दोस्तों, मैं आप को अपने विषय में बताता दूँ। मैं बहुत दूर जंगलों से आया हूं।

Doctor Frog: डॉक्टर टर्र-टर्र

मेरा नाम डॉक्टर टर्र-टर्र है। मैं एक डॉक्टर हूं और मेरे पास सभी बीमारियों का इलाज है। अतः आप सब जानवर आगे से अपनी बीमारी का इलाज कराने मेरे पास आ सकते हैं ।”यह सुनकर एक चालाक लोमड़ी ऊंची आवाज में बोली,” यदि तुम इतने ही बड़े काबिल डॉक्टर हो तो पहले अपने लंगड़े पन का इलाज क्यों नहीं करते?देखो! तुम्हें किस प्रकार हर समय फुदक-फुदक कर चलना पड़ता है।”

लोमड़ी की यह बात सुनकर वहां एकत्र सभी जानवर जोर-जोर से हंसने लगे तथा झूठे और घमंडी मेंढक का मुंह शर्म से लाल हो गया। इसके साथ ही घमंडी मेंढक उस तालाब को छोड़कर भाग गया था ।

अतः कहा भी गया है कि झूठ सदैव पकड़ा जाता है।

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