Guru Purnima 2022: कब है गुरु पूर्णिमा? जानें इसका क्या है धार्मिक महत्व

- Advertisement -

More articles

- Advertisement -

Guru Purnima: आज में आपको गुरु पूर्णिमा के बारे में बताने जा रही हु, कि गुरु पूर्णिमा का महत्व क्या है , कैसे पूजा करते है और 2022 में कब है गुरु पूर्णिमा क्यों मनाया जाता है। भारत देश में गुरुओ का बहुत ही सम्मान किया जाता है क्योकि एक गुरु ही है जो अपने शिष्यों को गलत मार्ग से हटाकर सही रास्ते पे लाते है।

पुराणे काल में बहुत सी ऐसी कथाएं सुनने को मिलती है । जिससे यह पता चलता है कि किसी भी व्यक्ति को महान बनाने में विशेष गुरुओ का योगदान रहता है।

गुरु पूर्णिमा को मनाने का कारण बहुत ही बड़ा है । यह भी माना जाता है  कि इस दिन महान गुरु महर्षि वेद व्यास जिन्होंने ब्रह्मसूत्र , महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता और 18 पुराण जैसे अद्भुद साहित्य की रचना की उनका जन्म हुआ था । शास्त्रों में गुरु पूर्णिमा को वेद व्यास का जन्म समय माना गया है। इसलिए आषाढ़ माँ के पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।

इस दिन सभी शिष्य अपने अपने गुरुओ का आशीर्वाद लेते है और उन्होंने अब तक जो कुछ भी दिया है उसके लिए धन्यवाद करते है।

गुरु शब्द दो अक्षरों से बना है गु जिसका अर्थ अंधकार होता है और रु का अर्थ प्रकाश यानी जो आपको अज्ञानता के ज्ञान के प्रकाश के तरफ ले जाता है वह आपका गुरु है पूर्णिमा शब्द भी इसी तरह दो अक्षरों के सहयोग से बना है purni यानी पूरा और ma यानी माह का परिचाय है यानी स्थति को माह पूरा हुआ आधी काम में समय की घरना चन्द्रमा या सूर्य की गति पर निर्भर करती थी ।

Guru Purnima

इसलिए पूर्णिमा को चाँद से भी जोड़ कर देखा जाता है इसलिए इसके गुरु चन्द्रमा ही है जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है। वैसे ही गुरु चरणों में उपस्थित साधको को ज्ञान शक्ति , भक्ति और योग की शक्ति मिलती है। गुरु पूर्णिमा के दिन के बाद से 4 महीने अध्यन की दृष्टि से बहुत ही उपयोगी होते है ।

बारिश के मौसम होने के कारण यह दिन ना ही बहुत गर्म और ना ही बहुत ठंडे Hote है। प्राचीन काल में इन दिनों गुरु प्रवास करने की बजाए 4 महीने के लिए किसी एक स्थान पर रुक जाते थे और आस पास के गांव वाले के लोगो को ज्ञान दिया करते थे गुरु पूर्णिमा के अगले दिन से ही सावन की शुरुवात हो जाती है इसे भगवान शिव का माह कहा जाता है।

इन दिनों में शिवजी की पूजा करना अच्छा माना जाता है। गुरु का हमारे जीवन में सबसे बड़ा योगदान होता है। गुरु की इस महानता को देखते हुए संत कबीर दास ने लिखा है –

गुरु पूर्णिमा श्लोक

गुरु गोविन्द दोउ खड़े ,
काके लाग पाय।
बलिहारी गुरु अपने
गोविन्द दियो बताय

इसक अर्थ – गुरु का स्थान भगवान से भी ऊपर बताया जाता है वही महर्षि वेद व्यास ऋषि पराशर के पुत्र थे। शास्त्रों के अनुसार व्यास को तीनो कालो का ज्ञाता माना जाता है वो तीन काल यह है पुरपाषण काल , मध्यपाषाण काल , नवपाषाण काल। महर्षि वेद व्यास जी ने वेदो को अलग अलग खंडो में बाट दिया।

Check this Also: भाईदूज का त्यौहार

Guru Purnima 2022 | गुरु पूर्णिमा कब है

गुरु पूर्णिमा हिन्दू कैलेंडर के आषाढ़ माह में पूर्णिमा के दिन या पूर्णिमा को मनाई जाती है। यदि अंग्रेजी कैलेंडर की बात करे तो यह जुलाई – अगस्त के महीने में पड़ता है। गुरु पूर्णिमा 2022 की तिथि 13 जुलाई, बुधवार है।

पूर्णिमा तिथि शुरू – 04:01 सुबह जुलाई 13, 2022

पूर्णिमा तिथि समाप्त – 00:06 सुबह जुलाई 14, 2022

गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि

सुबह – सुबह घर की अच्छी से सफाई करके स्नान करने के बाद पूजा का संकल्प लेना है। उसके बाद किसी साफ़ सुथरे स्थान पर सफ़ेद कपड़ा बिछाकर उस पर व्यास पीठ का निर्माण करना होगा। फिर आपको गुरु की प्रतिमा स्थापित करने के बाद उन्हें चंदन ,रोली ,पुष्प ,फल और प्रसाद आदि का अर्पित करना होगा।

इसके बाद व्यासजी, शुक्रदेवजी, शंकराचार्यजी आदि गुरुओं का मनन करके उनका आवाहन करना चाहिए। फिर आपको ‘गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये’ मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।

गुरु पूर्णिमा किस तारीख को है

सूर्योदय                         13 जुलाई, 2022                     05:58 पूर्वाह्न।
सूर्य का अस्त होना         13 जुलाई, 2022                     07:08 अपराह्न।

गुरु पूर्णिमा की कथा

आषाढ़ माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा कहते है प्रचीनकाल में विधार्थी गुरुकुलों में शिक्षा प्राप्त करने जाते थे। छात्र इस दिन श्रंद्धाजलि से प्रेरित अपने गुरु का पूजन करके अपनी शक्ति के अनुसार दक्षिणा देकर उन्हें प्रसन्न करते थे। इस दिन पूजा से निवृत्त होकर अपने गुरु के पास जाकर वस्त्र , फल और फूल माला अर्पण करके उन्हें प्रसन्न करना चाहिए। गुरु का आशीर्वाद कल्याणकारी और ज्ञानवर्धक होता है।

चारो वेदो के रचियता व्यास ऋषि थे। हमे वेदो का ज्ञान देने वाले व्यासजी ही है। इसलिए वह हमारे आदि गुरु हुए उनकी स्मृति को ताजा रखने के लिए हमे अपने अपने गुरुओ को व्यास जी का अंशमान कर उनकी पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से हमारे जीवन में ज्ञान बढ़ जाएगा।

गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करना चाहिए

गुरु पूर्णिमा के दिन गौ माता की सेवा करनी चाहिए जितनी आपसे बनती है यदि आप उनको खीलाना चाहिए। आप गुड़ और रोटी जरूर खिलाए। यदि आप चारा खिला सकते है तो वो भी खिलाइये। इसी तरह आप गौ माता की सेवा करते है पीले वस्तुओ का दान करना सबसे उत्तम बताया गया है।

जो भी आपके पास पीले रंग के वस्तुएं , फल या मिठाई है आप उनको दान करना चाहिए। पूर्णिमा के दिन जो भी धार्मिक पुस्तकों का दान करते है उस दिन उत्तम फल की प्राप्ति होती है। यदि आप पूर्णिमा के दिन केले के पेड़ की पूजा करते है तो उनकी विशेष कृपा आप पर बनी रहती है।

गुरु पूर्णिमा 2022 कब है ?

गुरु पूर्णिमा 2022 13 जुलाई, 2022 को है।

गुरु क्या होते है ?

भारत देश में गुरुओ का बहुत ही सम्मान किया जाता है क्योकि एक गुरु ही है जो अपने शिष्यों को गलत मार्ग से हटाकर सही रास्ते पे लाते है। पुराणे काल में बहुत सी ऐसी कथाएं सुनने को मिलती है । जिससे यह पता चलता है कि किसी भी व्यक्ति को महान बनाने में विशेष गुरुओ का योगदान रहता है।

गुरु पूर्णिमा के दिन किस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए ?

गुरु पूर्णिमा के दिन ‘गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।

- Advertisement -

MOST POPULAR ARTICLES

TRENDING NOW

Latest

- Advertisement -