होली पर्व, Holi Shubh Muhurat 2023, आइये जानते है, होलिका दहन का शुभ समय

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भारतीय परंपरा में होली पर्व का विशेष महत्व है। होली का त्योहार वसंत में मनाए जाने वाला प्रमुख त्योहार है। भारतीय कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन मास की पूनम को पूरे भारतवर्ष में होली का त्योहार मनाया जाता है। होली रंगों खुशियों का त्योहार है। होली भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में मनाए जाने वाला त्यौहार है। पारंपरिक तौर पर यह त्यौहार 2 दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन होलिका माता का दहन किया जाता है तथा अगले दिन धूलंडी, धूरंडी ,धूर खेल, धुलीवंदन आदि नाम से पुकारे जाने वाला त्योहार मनाया जाता है। होली रंगों का त्योहार माना जाता है। लोग अबीर गुलाल, रंग ढोल बजाकर, भुजिया आदि व्यंजन खाकर नाच गाकर होली का त्यौहार मनाते हैं। गाने बजाने रंग रोगन मिठाइयों के साथ यह त्यौहार खुशियों भरा होता है।

होलिका दहन शुभ मुहूर्त (Holika Dahan 2023 Shubh Muhurat) 

होलिका दहन 17 बृहस्पतिवार, मार्च 17, 2022 को किया जाएगा.  इस साल होलिका  दहन का शुभ मुहूर्त रात में 9 बजकर 16 मिनट से लेकर 10 बजकर 16 मिनट तक ही रहेगा. ऐसे में होलिका दहन की पूजा के लिए आपको सिर्फ 1 घंटे 10 मिनट का ही समय मिलेगा. इसके अगले दिन शुक्रवार, 18 मार्च 2022 को रंगवाली होली खेली जाएगी. 

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – मार्च 17, 2022 को 01 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी

पूर्णिमा तिथि समाप्त – मार्च 18, 2022 को 12 बजकर 47 तक रहेगी

भद्रा पूँछ- रात में 09 बजकर 06 से लेकर 10 बजकर 16 तक 
भद्रा मुख – 17 मार्च रात 10 बजकर 16 से लेकर 18 मार्च 12 बजकर 13 तक

होली को लेकर कई पौराणिक कथाएं तथा मान्यताएं प्रचलन में रही है। भारतवर्ष में होली का त्योहार राधा कृष्ण के पावन प्रेम का प्रतीक माना जाता है। कथा के अनुसार एक बार भगवान कृष्ण ने माता यशोदा से पूछा कि वह स्वयं राधा की तरह गोरी क्यों नहीं होते तो यशोदा माता ने उन्हें राधा के चेहरे पर रंग मिलने से राधा जी का रंग कन्हैया की तरह हो जाएगा। ऐसा कहा इसी के बाद राधा और गोपियों के साथ रंगों वाली होली खेलने के लिए श्री कृष्ण काफी चर्चा में रहे, तभी से रंगों का पर्व मनाया जाने लगा ऐसी मान्यता हिंदू धर्म में रही है।

 

एक अन्य कथा भी प्रचलन में है, कि राक्षस राजा हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका को अमर होने का आशीर्वाद मिला हुआ था। उन्हें पूरे ब्रह्मांड में कोई नहीं मार सकता था हिरण्यकश्यप का एक पुत्र था। जिसका नाम प्रहलाद था वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। क्रोध से हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को मारने की कोशिश की, परंतु असफल रहे। अंत में उन्होंने अपनी बहन होलिका को इसके लिए प्रेरित किया। उन्होंने पुत्र प्रहलाद को होलिका की गोद में बैठ कर आग में जलने के लिए कहा प्रहलाद विष्णु भक्त था। उसकी भक्ति के कारण चमत्कार हुआ और होली का जोकि प्रहलाद को लेकर आग में बैठी थी, वह जलकर राख हो गई और प्रहलाद सुरक्षित बच निकला, इसी कारण होली को बुरे के ऊपर अच्छे उत्सव का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए कहा जाता है हमेशा अच्छाई की जीत होती है। भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम को याद कर भी होली मनाई जाती है। होली में मथुरा वृंदावन में रास लीलाओं का आयोजन होता है। अन्य शहरों में लठमार होली, ब्रज की होली कपड़े फाड़ होली आदि कई रूप मे होली प्रचलित है।

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Holi Shubh Muhurat 2022, होली पर किए जाने वाले सभी कार्य प्रकार हैं

  • होली पर लोग रंग और पानी से होली खेलते हैं। गुलाल आदि लोगों के चेहरे पर लगाते हैं।
  • प्राकृतिक अवयवों से बने नींम कुमकुम हल्दी फूलों आदि का अर्क इसमें शामिल किया जाता है।
  • शाम को विशेष लकड़ियों से झाड़ पुस से गोबर के कंडे से लकड़ी की दूध,नारियल आदि आग में फेंक कर होलिका दहन किया जाता है।
  • लोग अपने परिवार वालों साथियों, दोस्तों के साथ नाचते-गाते, दावतों का आयोजन करते हैं।
  • नई फसल का प्रतीक भी इस त्यौहार को माना जाता है।
  • होली मेला नामक बड़े मेले का आयोजन उत्तर प्रदेश के शहरों में किया जाता है।
  • बंगाल में तो युवा लड़कियां सफेद और भगवा कपड़ों कपड़ों पर हरफूल सजाए घूमती है, नाचते गाते आती है।
  • रंग बिरंगे रंगों के साथ मिठाइयों, मालपुर, खीर, भुजिया खुशियां मनाते हैं।
  • कर्नाटक का लोक नृत्य होली में बिदारा वैशा बहुत प्रसिद्ध है तमिलनाडु में अंगूनी के रूप में मनाया जाता है।
  • होली को इस दिन भगवान राम- माता सीता, शिव- पार्वती, मुर्गा- देवसेना का विवाह भी किया जाता है और महालक्ष्मी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जो कि दूध के महासागर से महालक्ष्मी के अवतार का स्मरण करती है।
  • कह सकते हैं कि पूरे भारतवर्ष में अलग-अलग तरीकों से होली का पर्व मनाया जाता है।

होली कब मनाई जाती है?

होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है ।

होली पर किसका महत्त्व होता है ?

होली पर रंगो का महत्त्व होता है।

होली कब है ?

होली 17 मार्च 2022 को है।

Happy Holi Wishes

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