जमीन पर देख कर चलो

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जमीन पर देख कर चलो:- एक ज्योतिषी था|जो दिन रात सूरज चांद , सितारों की गणना करता था|आकाश मंडल में तारों की निरीक्षण में वह इतना मगन हो जाता कि उसको किसी और बात का होश ही ना रहता था| यहां तक कि उसे यह भी ध्यान नहीं रहता था कि चलते समय उसके पैर कहां पर पड़ रही है?

जमीन पर देख कर चलो

एक दिन इसी तरह अपनी धुन में मस्त वह आकाश की और देखता हुआ चला जा रहा था कि तभी उसे ठोकर लगी और वह कटो की एक झाड़ी में फंस गया|

कांटे चुभने से उसे दर्द होने लगा| झाड़ी से निकलने का प्रयास करती हुए वह मदद के लिए चिल्लाने लगा|
कुछ व्यक्तियों ने उसकी आवाज सुन ली और उन्होंने उसकी मदद के लिए आकर उसे झाड़ी से निकाला|एक व्यक्ति ने पूछा,”आप इतनी बड़ी झाड़ी में कैसे फंस गए, क्या आपको यह झाड़ी दिखाई नहीं दी थी?”ज्योतिषी में झाड़ी में गिरने का अपना कारण बता दिया| कारण जाने पर सभी लोग हंसने लगे और ज्योतिषी से बोले,” आप दो आकाश को देखकर गणना कर सकते हो परंतु अपने पास ही वस्तुओं को कि प्रकार देख भी नहीं सकते|

भाई, सच्चाई देखो और सपनों की दुनिया में रहना छोड़ दो|” लोगों की बात सुनकर ज्योतिषी बहुत लज्जित हुआ|

अतः वास्तविक दुनिया को छोड़कर सपनों में खोए रहना बेवकूफी है|

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