दुष्ट पर दया मुसीबत है

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दुष्ट पर दया मुसीबत है:- एक गांव में एक किसान रहता था। मैं बहुत दयालु था। किसी को भी संकट में देखकर वह उसकी मदद करने के लिए तुरंत तैयार हो जाता था। एक बार की बात है, 1 दिन किसान ने रास्ते में एक लहू – लुहान सांप को पड़े देखा।

दुष्ट पर दया मुसीबत है

सांप को इस तरह पड़े देखकर उसे दया आ गई तथा वह उसे उठाकर घर ले आया। उसकी पत्नी ने जब देखा कि किसान एक घायल विषैले सांप को लेकर घर आया है तो वह उसे बोली,”माना कि प्रत्येक आदमी को दयालु होना चाहिए,परंतु दया करके वक्त उसे हमेशा इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जिस पर दया की जा रही है, वह उस दया का पात्र है भी या नहीं।

“किसान ने उसकी बात को अनसुना कर दिया और सांप के ख्वाबों पर दवा लगाकर उसके पीने के लिए दूध लाने चला गया। कुछ देर में सांप को होश आया। दवा के कारण सांप का भाव से रक्त बहना बंद हो गया था। अब तक किसान सांप के लिए कटोरे में दूध ले आया था।

जैसे ही उसने दूध का कटोरा सांप के पास रखा, अपनी प्रवृति के अनुरूप सांप ने उसे डस लिया। सांप के जहर के प्रभाव से वह दयालु किसान की तुरंत मृत्यु हो गई।

अतः कहा गया है कि दुष्ट पर दया नहीं करनी चाहिए क्योंकि दुष्ट अपनी दुष्टता कभी नहीं छोड़ता।

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