राधा अष्टमी 2021 | Radha Ashtami Pooja Date and Time, 2021 Radha …

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Radha Astami Pooja Date and Time:- इस वर्ष राधाष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी। राधा अष्टमी हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। राधा अष्टमी को श्री राधा अष्टमी भी कहा जाता है । राधा अष्टमी को कृष्णप्रिया राधा रानी के जन्मदिन के रुप में मनाते हैं। पौराणिक शास्त्रों के अनुसार कृष्ण के जन्मदिन भादोंक्षकृष्ण पक्ष अष्टमी से 15 दिन बाद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को दोपहर अभिजीत मुहूर्त में श्री राधा जी राजा वृषभानु की यज्ञ भूमि से प्रकट हुई थी। जानते हैं राधा रानी के जन्म की कथा

Radha Astami Pooja Date and Time

श्री कृष्ण भक्ति के अवतार देवर्षि नारद ने एक बार भगवान् सदाशिव के श्री चरणों में प्रणाम करके पूछा, हे महाभाग मैं आपका दास हूं बताइए श्री राधा देवी लक्ष्मी जी है या देव पत्नी महालक्ष्मी है, या सरस्वती, क्या वह अंतरंग विद्या है या वैष्णवी प्रकृति, कहिए वेद कन्या है या देवकन्या है , मुनि कन्या है । सदाशिव बोले हे मुनिवर अन्य किसी लक्ष्मी की बात क्या करें, कोटि-कोटि महालक्ष्मी उनके चरण कमल की शोभा के सामने तुच्छ कही जाती है।

Radha Astami Pooja

हे नारद जी एक मुंह से मैं अधिक क्या कहूं मैं तो श्री राधा के रूप, लावण्य और गुण आदि का वर्णन करने में अपने को असमर्थ पाता हूं। उनके रूप आदि की महिमा कहने में भी लज्जित हो रहा हूं । तीनों लोकों में कोई भी ऐसा समर्थ नहीं है, जो उनके रूप-आदि का वर्णन करके पार पा सके । उनकी रूप माधुरी जगत मोहने वाले श्री कृष्ण को भी मोहित करने वाली है, यदि अनन्त मुंह से चाहूं तो भी उसका वर्णन करने कि मुझ में क्षमता नहीं है।

“हे प्रभु श्री राधिका जी के जन्म का महत्व सब प्रकार से श्रेष्ठ है। भक्तवत्सल! उसको मैं सुनना चाहता हूं” हे महाभाग!सब व्रतों में श्रेष्ठ व्रत श्री राधा अष्टमी के विषय में मुझ को समझाइए ।श्री राधा का ध्यान कैसे किया जाता है?

भगवान शिव बोले वृषभानुपुरी राजा वृषभानु महान् उदार थे। वे महान कुल में उत्पन्न हुए, सब शास्त्रों के ज्ञाता थे। अणिमा महिमा आदि आठों प्रकार की सिद्धियों से युक्त श्रीमान धनी और उदार चैता थे । वह संयमी कुलीन सद्विचार से युक्त तथा श्री कृष्ण के आराधक थे। उनकी भार्या श्रीमती श्रीकीर्तिदा थी। वह रूप योन से संपन्न थी और महालक्ष्मी के समान भव्य रूप वाली परम सुंदरी थी। सर्वविद्याओं और गुणों से युक्त, कृष्ण स्वरूपा, महा पतिव्रता थी । उनके ही गर्भ में शुभदा भाद्रपद की शुक्ल अष्टमी को मध्याह्न काल में श्री वृंदावनेश्वरी श्री राधिका जी प्रकट हुई है ।

श्री राधा जन्म महोत्सव में भजन पूजन अनुष्ठान आदि का विशेष महत्व हैराधा अष्टमी के दिन श्री कृष्ण और राधा जी की पूजा होती है।भक्तों के लिए राधा अष्टमी का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि लोग व्रत रखते हैं,तो उनके घरों में धन की कमी नहीं होती है। उन पर श्री कृष्ण व राधा जी की कृपा होती है।यही वजह है कि अपने आराध्य कृष्ण को मनाने के लिए भक्त पहले राधा रानी को प्रसन्न करते हैं। यह भी मान्यता है, कि राधा अष्टमी का व्रत करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

राधा अष्टमी का मुहूर्त | Radha Astami Pooja Date and Time

भादो मास शुक्ल पक्ष की अष्टमी को श्री राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है इस वर्ष यह त्यौहार 25 अगस्त को मनाया जाएगा । इस दिन दोपहर 1 बजकर 58 मिनिट पर सप्तमी तिथि समाप्त हो जाएगी। इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी,जो कि 26 अगस्त को दिन के 10 बजकर 28 मिनिट तक रहेगी शास्त्रों के अनुसार, कृष्ण के जन्मदिन भादो कृष्ण पक्ष अष्टमी से 15 दिन बाद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को दोपहर अभिजित मुहूर्त में श्री राधा जी राजा बृजभान वृषभानु की यज्ञ भूमि से प्रकट हुई थी।

राधा अष्टमी पूजा विधि

सदा श्री राधा जन्माष्टमी के दिन व्रत रखकर उनकी पूजा करनी चाहिए । श्री राधा कृष्ण के मंदिर में ध्वजा,पुष्पमाल्य , वस्त्र , पताका व तोरण आदि नाना- प्रकार के मंगल द्रव्यों से यथा विधि पूजा करनी चाहिए। स्तुति पूर्वक सुभाषित गंध, पुष्प, धूपादि से सुगंधित करके उस मंदिर के बीच में पांच रंग के चूर्ण से मंडप बनाकर उसके भीतर षोडश दल के आकार का कमल यंत्र बनाएं, उस कमल के मध्य में दिव्यासन पर श्री राधा कृष्ण की युगल मूर्ति पश्चिम अभिमुख स्थापित करके ध्यान, पाध्य अघृयादि से क्रमपूर्वक भली-भांति उपासना कर के भक्तों के साथ अपनी शक्ति के अनुसार पूजा की सामग्री लेकर भक्ति पूर्वक संयतचित होकर उनकी पूजा करें।

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